गर्भवती महिलाएं आलू कम खाएं


मेरीलैंड। आलू से बनी चीजें ज्यादा खाने से गर्भवती महिलाओं को एक खास तरह का डायबिटीज हो सकता है. इससे मां और बच्चे दोनों को कई तरह के खतरे हो सकते हैं. खास कर तला हुआ आलू या चिप्स.
मेरीलैंड में की गई एक स्टडी के मुताबिक जेस्टेशनल डायबिटीज के नाम से जानी जाने वाली खास बीमारी मां को गर्भावस्था के दौरान होती है. इसके स्वास्थ्य पर दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं. मां और बच्चे दोनों को हृदय रोग और अन्य प्रकार के डायबिटीज का भी खतरा रहता है. आलू दुनिया भर में शौक से खाया जाता है. सभी देशों में आलू खानपान का अहम हिस्सा है. इसमें कार्बोहाइड्रेट के अलावा विटामिन सी और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व भी होते हैं. लेकिन हरी साqब्जयों के मुकाबले इसमें स्टार्च की भरपूर मात्रा होती है. इसका सीधा संबंध रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने से है.
आमतौर पर डायबिटीज तब होता है जब शरीर आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता. इंसुलिन की मदद से शरीर की कोशिकाएं रक्त से ग्लूकोज सोखती हैं. इंसुलिन की अपर्याप्तता होने पर ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है. अभी तक जेस्टेशनल डायबिटीज और आलू खाने के बीच संबंध की जांच नहीं हुई थी. मेरीलैंड के नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ हेल्थ में ाqक्वलिन झांग के नेतृत्व में रिसर्चरों ने डाटा का अध्ययन किया. इस डाटा में १९८९ से एक लाख पंद्रह हजार महिलाओं की स्वास्थ्य जानकारी दर्ज थी.
रिसर्च में कहा गया है, ठआलू का ज्यादा सेवन जेस्टेशनल डायबिटीज के ज्यादा खतरे से खास तौर पर जुड़ा है.ठ डॉक्टरों के मुताबिक गर्भवती महिलाओं को अपनी खुराक बदलनी चाहिए. उन्हें आलू के बजाय लोबिया, मटर, दालें और हरी साqब्जयां ज्यादा खानी चाहिए. रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि हफ्ते में दो बार आलू का सेवन अगर अन्य साqब्जयों या पूर्ण अनाज से बदल दिया जाए तो जेस्टेशनल डायबिटीज के खतरे को १० फीसदी तक कम किया जा सकता है. हालांकि साांqख्यकीय प्रमाण होने के बावजूद रिसर्चर कहते हैं कि डायबिटीज के और आलू खाने के बीच कारण और परिणाम जैसा सीधा संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता.