जिनके डॉयलॉग सुनने लोग जाते थे थियेटर


फिल्मी दुनिया में एक ऐसा भी कलाकार था जिसके मुंह से निकलने वाले शब्द सुनकर ही लोग भाव-विभोर हो जाया करते थे।
(Photo: IANS)

क्या आप जानते हैं कि फिल्मी दुनिया में एक ऐसा भी कलाकार था जिसके मुंह से निकलने वाले शब्द सुनकर ही लोग भाव-विभोर हो जाया करते थे। जी हां, उस कलाकार का नाम कुलभूषण खरबंदा ही है, जो कि अपनी डायलॉग डिलीवरी के लिए मशहूर रहे हैं।

थियेटर ही नहीं बल्कि फिल्मों में भी उनके अभिनय की भूरी-भूरी प्रशंसा होती रही है। कुलभूषण ने अपने बचपन से ही थियेटर किया, जब वो कॉलेज पढ़ाई के लिए पहुंचे तो वहां भी कई प्ले किए। यह कला प्रेम ही था कि उन्होंने दोस्तों के साथ मिलकर अभियान नामक थियेटर ग्रुप बना डाला।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के करोड़ीमल कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद वे कोलकाता गए और वहीं एक थियेटर ग्रुप के साथ जुड़ गए। कुलभूषण का अभिनय और डॉयलॉग डिलेवरी देखकर लोग उन्हें फिल्मों में काम करने की सलाह दिया करते थे।

इसी बीच हुआ यूं कि कुलभूषण के एक परिचित ने मशहूर फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल को अपनी फिल्म में काम कराने के लिए उनके नाम का सुझाव दिया। उनकी सलाह पर कुलभूषण को मुंबई बुलाया गया, लेकिन यह क्या कुलभूषण ने तो आने से ही इंकार कर दिया।

इसकी वजह गुरुर नहीं बल्कि उनकी यह सोच थी कि काम तो मिलेगा नहीं उल्टा आने-जाने और ठहरने में पैसा खर्च हो जाएगा। जब श्याम बेनेगल को यह बात मालूम चली तो उन्होंने कुलभूषण को फ्लाइट का टिकेट भेज मुंबई बुलवाया।

इसके बाद इन दोनों की जोड़ी खूब जमी और देखते ही देखते श्याम बेनेगल के निर्देशन में कुलभूषण ने मंथन, भूमिका, जुनून और कलयुग जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय किया। यही नहीं बल्कि कुलभूषण ने रमेश सिप्पी के साथ भी काम किया।

शान में कुलभूषण ने शाकाल का जो निगेटिव रोल प्ले किया उसने भारतीय सिनेमा को विलेन की छवि को एक तरह से नई परिभाषा गढऩे के लिए मजबूर कर दिया। उस दौर में कुलभूषण एक ऐसे मंजे हुए कलाकार थे जो बॉलीवुड के कॉमर्शियल और आर्ट दोनों तरह की फिल्मों में बखूबी काम कर रहे थे।

कुलभूषण ने अपनी डॉयलॉग डिलेवरी और शानदार अदाकारी का जादू सूरमा, अजहर, ब्रदर्स और हैदर जैसी फिल्मों में भी बिखेरा।