भारत में सिनेमा की नींव रखने वाले दादा साहब फाल्के की पहली फिल्म कौन सी थी, क्या था बजट?


(PC : EMS)

दादा साहब फाल्के को भारतीय सिनेमा के जन्मदाता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने ही भारत में सिनेमा की नींव रखी। दादा साहेब फाल्के ने ही देश में सिनेमा की शुरुआत की और साल 1913 में उन्होंने राजा हरिश्चंद्र नाम की एक फीचर फिल्म बनाई।

पहली मूक फिल्म बनायी

दादासाहब फाल्के एक जाने-माने प्रड्यूसर, डायरेक्टर और स्क्रीनराइटर थे जिन्होंने अपने 19 साल लंबे करियर में 95 फिल्में और 27 शॉर्ट मूवीज़ बनाईं। दादा साहेब फाल्के का असली नाम धुंधिराज गोविन्द फाल्के था। उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट ‘द लाइफ ऑफ क्रिस्ट’ फिल्म थी, यह एक मूक फिल्म थी। इस फिल्म को देखने के बाद दादा साहब के मन में कई तरह के विचार आने लगे तभी उन्होंने अपनी पत्नी से कुछ पैसे उधार लिए और पहली मूक फिल्म बनाई।

राजा हरिश्चंद्र’ पहली फीचर फिल्म

दादा साहब फाल्के ने ‘राजा हरिश्चंद्र’ से डेब्यू किया जिसे भारत की पहली फुल-लेंथ फीचर फिल्म कहा जाता है। बताया जाता है कि उस दौर में दादा साहब फाल्के की ‘राजा हरिश्चंद्र’ का बजट 15 हजार रुपये था।

दादा साहब फाल्के ने फिल्मों में मह‍िलाओं को काम करने का मौका दिया। उनकी बनाई हुई फिल्म भस्मासुर मोहिनी’ में दो औरतों को काम करने का मौका मिला जिनका नाम था दुर्गा और कमला। दादासाहब फाल्के एक जाने-माने प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और स्क्रीनराइटर थे जिन्होंने अपने 19 साल लंबे करियर में 95 फिल्में और 27 शॉर्ट मूवीज बनाईं।

दादा साहब फाल्के की आखिरी मूक फिल्म ‘सेतुबंधन’ थी। भारतीय सिनेमा में दादा साहब के ऐतिहासिक योगदान के चलते 1969 से भारत सरकार ने उनके सम्मान में ‘दादा साहब फाल्के’ अवार्ड की शुरुआत की। भारतीय सिनेमा का यह सर्वोच्च और प्रतिष्ठित पुरस्कार माना जाता है। सबसे पहले देविका रानी चौधरी को यह पुरस्कार मिला था।

यहां देखिये दादा साहेब फाल्के की पहली फिल्म ‘राजा हरिशचंद्र’