इरफान खान को गुस्सा क्यों आता 


वह एक बेहतरीन अभिनेता हैं, पर इसी के साथ ही उनका गुस्सा भी जग जाहिर है। अभिनेता इरफान खान इस आरोप को सिरे से खारिज कर देते हैं कि वह स्वभाव से गुस्सैल हैं।

आपका स्वभाव काफी गुस्सैल है?
ऐसी कोई बात नहीं है। मेरा माथा तो हमेशा बहुत ठंडा रहता है। वैसे बाहर से कोई भी किसी के बारे में धारणा बना सकता है। पर यकीन मानिए मैं जरा भी बदमिजाज नहीं हूं। फिर मैं आपको किस एंगल से गुस्सेवाला लगा?

आपका गंभीर चेहरा इसी बात का एहसास कराती हैं?
मेरी बात को थोड़ा गंभीरता से लेकर मेरे फिजिकल लुक से मेरे बारे में कोई धारणा मत बनाइये। मैं बहुत शांतिप्रिय व्यक्ति हूं। और गंभीर रहना तो कोई गलत बात नहीं है। असल में मैं बेवजह ज्यादा बातें करना पसंद नहीं करता हूं।

क्या घर में भी आप इसी तरह से सोच-विचार कर बात करते हैं?
वह तो आपको मेरे घर में आकर देखना पडेगा। मैं एक खुशहाल परिवार का सदस्य हूं। मेरे दो बच्चे हैं बाबिल और आयान। उनके साथ समय बिताना मुझे बहुत पसंद है। अब यह बात दीगर है कि मैं उन्हें ज्यादा समय नहीं दे पाता हूं। उनकी पढ़ाई-लिखाई मेरी बीवी देखती है।

आप न्यूमरोलॉजी में भी बहुत यकीन करते हैं? आपके नाम की स्पेिंलग में एक और `आर’ देखने को मिलता है?
अच्छा, मुझे तो पहली बार यह पता चला। वैसे आपने कहां देखा?

क्यों, विकीपीडिया से लेकर आपकी वेबसाइट में तो यही लिखा जाता है…
सच कहूं तो मुझे तो इस बारे में कुछ पता नहीं था। मैं इस बारे में सब कुछ पता करूंगा।

आप पारिवारिक टायर के बिजनेस को छोड़ कर एिंक्टग में वैâसे आ गये?
मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं एिंक्टग करूंगा। वैसे जिस दिन से हिन्दी फिल्में देखना शुरू किया था, उस दिन से ही मेरी सोच में एक बदलाव आने लगा था। तब मैं स्वूâल में पढ़ता था। हिन्दी फिल्मों के मामले में पक्का था। उस समय देखी गयी कुछ फिल्मों ने मेरी िंजदगी की दिशा ही बदल दी।

उन फिल्मों ने मुझे इस कदर प्रभावित किया था कि मैंने एकदम तय कर लिया था कि मुझे अभिनेता ही बनना है। उसके बाद तो स्कॉलरशिप पाकर दिल्ली के नेशनल स्वूâल ऑफ ड्रामा में भर्ती हो गया। बाकी बातें तो सभी जानते हैं।