#YesBank संकट पर वित्तमंत्री ने कहा – सब चंगा सी!


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यस बैंक के ग्राहक घबराएं नहीं, पैसा सुरक्षित, 30 दिन में री-स्ट्रक्चरिंग: वित्त मंत्री

नई दिल्ली (ईएमएस)। देश के बड़े निजी बैंक में शुमार यस बैंक संकट पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता कर रिजर्व बैंक और सरकार की तरफ से उठाए जा रहे कदम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 2017 से ही रिजर्व बैंक की इसपर नजर है। 30 दिनों के भीतर यस बैंक का री-स्ट्रक्चर किया जाएगा। री-स्ट्रक्चरिंग को लेकर रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर पूरी जानकारी दी गई है।
बैंक कर्मचारियों की नौकरी एक साल तक सुरक्षित

वित्त मंत्री ने कहा, यस बैंक के कर्मचारियों की नौकरी, वेतन एक साल तक सुरक्षित हैं, जमाएं और देनदारियां अप्रभावित रहेंगी। आरबीआई पता लगाएगा कि यस बैंक में क्या गलत हुआ। वित्तमंत्री ने कहा इसमें व्यक्तिगत भूमिका का पता लगाना होगा। उन्होंने कहा कि यस बैंक ने अनिल अंबानी समूह, एस्सेल, डीएचएफएल, आईएलएफएस, वोडाफोन जैसी कंपनियों को लोन दिया था, जिसके कारण आज यह हालत हो गई है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि आरबीआई 2017 से ही यस बैंक की निगरानी कर रहा है, इस दौरान प्रशासन संबंधी मसले, कमजोर अनुपालन, गलत परिसंपत्ति वर्गीकरण की बात सामने आई। बैंक में गड़बड़ी के बारे में जांच एजेंसियों को भी मालूम है। कर्ज के जोखिम भरे फैसलों का पता चलने के बाद रिजर्व बैंक ने यस बैंक प्रबंधन में बदलाव पर जोर दिया था।

रिजर्व बैंक ने कहा कि स्ट्रैटिजिक इन्वेस्टर्स बैंक 49 प्रतिशत की इक्विटी लगाएंगे। रिजर्व बैंक ने कहा कि स्ट्रैटिजिक इन्वेस्टर्स बैंक तीन साल से पहले यस बैंक में अपनी हिस्सेदारी को 26 प्रतिशत से नीचे नहीं ला सकते है।यस बैंक ने अनिल अंबानी, एसेल ग्रुप, डीएचएफएल, वोडाफोन जैसी कंपनियों को लोन दिया जो डिफॉल्ट हुए हैं।ये सभी मामले 2014 से पहले के हैं जिस समय यूपीए सत्ता में थी।

स्टेट बैंक ने यस बैंक ने निवेश का इंट्रेस्ट दिखाया है।30 दिनों के भीतर यस बैंक का री-स्ट्रक्चर किया जाएगा। यह स्कीम रिजर्व बैंक लेकर आई है।बैंक की तरफ से निवेश लाने के लिए तमाम कोशिशें की गईं, लेकिन कुछ भी नहीं हो पाया।रिजर्व बैंक 2017 से इस बैंक के कामकाज पर गहरी नजर बनाकर रखा है।2004 में यस बैंक की स्थापना की गई थी। यस बैंक ने गलत लोगों को कर्ज दिया। सितंबर 2018 में रिजर्व बैंक ने इसके बोर्ड को बदलने का फैसला किया। बैंक ने लोन बांटने में लापरवाही बरती, जिसके कारण आज बैड लोन के नीचे बैंक दब गया है। सितंबर 2018 में बैंक के नए सीईओ को नियुक्त किया गया। यस बैंक के चेयरमैन ने भ्रष्टाचार भी किया और वे सीबीआई जांच के घेरे में भी आए थे। मार्च 2019 में नए सीईओ को नियुक्त किया गया