भविष्य में गायब हो जाएंगे टोल प्लाजा, हाईवे पर फर्राटा भरते हुए कटेगा टोल


एनएचएआई ऐसी चार नई तकनीकों पर विचार कर रहा

नई दिल्ली। आने वाले भविष्य में भारतीय हाइवे पर टोल प्लाजा के बगैर भी टोल संग्रह संभव होगा। जी हां, विश्व में ऐसी चार आनुधिक तकनीकें मौजूद हैं। एनएचएआई ऐसी चार नई तकनीकों पर विचार कर रहा है।

इसमें एक तकनीक जीपीएस/जीपीआरएस आधारित ई-टोलिंग की है, जिसमें टोल प्लाजाओं की जरूरत नहीं पड़ती। बल्कि, ये काम कम्प्यूटर पर वर्चुअल तरीके से कंट्रोल रूम में बैठकर हो जाता है। इनके नहीं होने से वाहन चालकों को भी किसी चीज़ की चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती। सारा पेमेंट ऑटोमैटिक तरीके से हो जाता है।

इसकी सबसे खास बात ये है कि वाहन चालक को केवल उतना टोल ही अदा करना पड़ता है, जितना सफर किया है। उससे न एक पैसा ज्यादा, न एक पैसा कम। अभी इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग में कम से कम 60 किमी का टोल देना पड़ता है। क्योंकि दो टोल के बीच अमूमन इतनी ही दूरी होती है। इसमें वाहन में आरएफआइडी तकनीक पर आधारित फास्टैग लगाना पड़ता है जो अगले टोल तक का टोल काट लेता है, चाहे आपको आधी दूरी तक ही जाना हो। वर्चुअल तरीके से इन सारे झंझटों से निजात मिल जाएगी। इसके साथ ही टोल बनाने और चलाने पर आने वाला एनएचएआई का काफी खर्चा बचेगा। एक सड़क पर एक ही वर्चुअल से काम चल जाएगा। फिलहाल इसके परीक्षण के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसके परिणाम काफी उत्साहवर्धक दिखाई दिए हैं।

एनएचएआई टोल संग्रह की जिन अन्य तकनीकों पर विचार कर रहा है उनमें दूसरी अहम तकनीक एनएफसी यानी ‘नियर फील्ड कम्यूनिकेशन कार्ड’ तकनीक है। इसमें वाहन चालक को मेट्रो रेल की तरह के एक प्रीपेड कार्ड का इस्तेमाल करना होता है। जिसे गेट पर लगे स्क्रीन पर टच करने पर टोल राशि कट जाती है। लेकिन इसमें टोल पर वाहन को कुछ देर के लिए रुकना पड़ता है इसके साथ ही खर्च एवं रखरखाव की समस्या भी जस की तस है।

तीसरी तकनीक एएनपीआर अर्थात ‘आटोमैटिक नंबर प्लेट रीकग्नीशन’ सिस्टम की है। इसमें टोल पर वाहन की नंबर प्लेट को पढ़ने वाली मशीनें लगानी पड़ती हैं।

चौथी तकनीक मल्टी लेन फ्री फ्लो यानी एमएलएफएफ है। इसमें सभी लेन में मौजूदा तरीके की इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग लागू करने का प्रस्ताव है। लेकिन ये तभी संभव है जब सभी वाहनों में फास्टैग लगा हो। फिलहाल ये बेहद कठिन काम दिखाई देता है। हां,एक पांचवीं तकनीक जरूर काम की लगती है, जिसमें मोबाइल ऐप/ब्लू टूथ/ सेंसर का उपयोग किया जाता है।

एनएचएआई को वैकल्पिक तकनीकों पर काम करने की जरूरत मौजूद के-टोलिंग को लेकर ट्रांस्पोटरों की शिकायत के मद्देनजर पड़ी है। जिनका कहना है कि इसमें झंझट है। फास्टैग लेना सबके लिए संभव नहीं। फास्टैग के बावजूद कई सड़कों पर वाहनों को रुकना पड़ता है। सरकार को टोल समाप्त कर पेट्रोल, डीजल पर सेस और बढ़ा देना चाहिए। ट्रांसपोर्टरों की मांग पर सरकार ने एक कमेटी बनाई थी। जिसने इस मांग को तो खारिज कर दिया, लेकिन टोलिंग में सुधार का वादा किया है। इसके लिए ट्रांसपोर्टरों के दो प्रतिनिधियों को इंडियन हाईवेज मैनेजमेंट कारपोरेशन (एनएचआईसीएल) के बोर्ड में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर जगह दी गई है।