कोरोना वायरस आया नहीं, पर शेयर बाजार धड़ाम! जानिये इतिहास की 5 सबसे बड़ी गिरावट


नई दिल्ली (ईएमएस)।भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का दिन बेहद अशुभ रहा। कोरोना वायरस के भीषण प्रकोप की आशंका की वजह से शुक्रवार को सेंसेक्स 1448.37 अंक लुढ़क गया। यह सेंसेक्स के इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है। अमेरिकी शेयर बाजार भी वायरस के प्रकोप के भय से धड़ाम हो गया। वायरस का प्रकोप सभी छह महादेशों में फैल चुका है। हम आपकों इस रिपोर्ट में बता रहे पांच सबसे बड़ी गिरावट के बारे में

24 अगस्त, 2015 (1,624 अंक)

चीन के शेयर बाजार में भारी गिरावट तथा कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की वजह से इस दिन शेयर बाजार में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। शंघाई शेयर बाजार में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई थी, इसके बाद दुनियाभर के बाजारों में इसका असर पड़ा था। बीएसई की कंपनियों की पूंजी इस एक दिन में 7 लाख करोड़ घट गई थी।

28 फरवरी, 2020 (1,448 अंक)

कोरोना वायरस के प्रकोप से सेंसेक्स 1,448 अंक लुढ़क गया। सेंसेक्स के इतिहास में यह दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स में 1,000 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।

21 जनवरी, 2008 (1,408 अंक)

दुनिया के सबसे ताकतवार मुल्क अमेरिका में मंदी की आशंका को लेकर दुनियाभर के शेयर बाजारों में गिरावट के कारण इस दिन सेंसेक्स में 1,408 अंकों की गिरावट हुई थी। कारोबार के दौरान यह 16,963 से भी नीचे आ गया था, लेकिन बाद में अपनी स्थिति मजबूत की और अंतत: 17,605 पर बंद हुआ।

24 अक्टूबर, 2008 (1,070 अंक)

साल 2008 में आई मंदी के कारण महज 10 महीने में सेंसेक्स 21,000 के स्तर से सीधे 8,000 के स्तर पर पहुंच गया था। इस दिन सेंसेक्स में 1,070 अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी। इस दिन निफ्टी 13 फीसदी तो सेंसेक्स 11 फीसदी गिरकर बंद हुआ था। यह सेंसेक्स के इतिहास की चौथी सबसे बड़ी गिरावट थी।

1 फरवरी, 2020 (988 अंक)

यह सेंसेक्स के इतिहास की पांचवीं सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट थी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट के दौरान की गई घोषणा से निवेशकों ने भारी बिकवाली की थी।