ओपेक ने तेल की मांग का अनुमान घटाया, एमसीएक्स पर लुढ़का कच्चा तेल


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वियना| पेट्रोलियम उत्पादक देशों के संगठन (ओपेक) ने अगले साल तेल की वैश्विक मांग के अनुमान को घटा दिया। धीमी विकास दर और अमेरिकी शेल गैस का उत्पादन बढ़ने की वजह से यह फैसला लिया गया।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, ओपेक की मासिक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 में तेल की वैश्विक मांग घटकर 13.6 लाख बैरल रह जाएगी जबकि इस साल यह 15.4 लाख बैरल है।

अमेरिका द्वारा ईरान पर प्रतिबंध लगाने की वजह से बीते महीनों में तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है।

एमसीएक्स पर २ फिसदी गिरा तेल

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के कारण घरेलू वायदा बाजार में तेल के दाम में गुरुवार को दो फीसदी की गिरावट आई। अमेरिका में तेल का भंडार बढ़ने की रिपोर्ट के बाद कीमतों में नरमी देखी जा रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर गुरुवार को कच्चे तेल का अक्टूबर वायदा अनुबंध शाम करीब छह बजे 109 रुपये यानी दो फीसदी की गिरावट के साथ 5,345 रुपये प्रति बैरल पर बना हुआ था। इससे पहले अक्टूबर डिलीवरी वायदा अनुबंध 5,313 रुपये प्रति बैरल तक लुढ़का। घरेलू वायदा बाजार में तीन अक्टूबर को कच्चे तेल का भाव 5,600 रुपये प्रति बैरल से ऊपर चला गया था, जोकि तकरीबन चार साल का उच्चतम स्तर है।

इंटरकांटिनेंट एक्सचेंज (आईसीई) पर ब्रेंट क्रूड का दिसंबर डिलीवरी वायदा 1.34 फीसदी की गिरावट के साथ 71.98 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ था। इससे पहले ब्रेंट क्रूड 81.15 डॉलर प्रति बैरल तक लुढ़का। ब्रेंट क्रूड में पिछले सत्र में भी दो फीसदी की गिरावट आई थी।

न्यूयार्क मर्के टाइल एक्सचेंज (नायमैक्स) पर अमेरिकी लाइट क्रूट वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का नवंबर डिलीवरी वायदा 1.37 फीसदी फिसलकर 72.17 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ था जबकि इससे पहले नवंबर अनुबंध 71.64 डॉलर प्रति बैरल तक लुढ़का। पिछले सप्ताह डब्ल्यूटीआई 76 डॉलर प्रति बैरल से ऊंचे स्तर पर चला गया था।

तेल बाजार के जानकार और एंजेल कमोडिटी के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी रिसर्च) अनुज गुप्ता ने कहा कि अमेरिका में तेल का भंडार बढ़ने और शेयर बाजार में भारी गिरावट आने से कच्चे तेल में नरमी देखी जा रही है।

उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा वैश्विक अर्थव्यस्था में सुस्ती आने की संभावना जताने से आगे तेल की खपत मांग घट सकती है जिससे कीमतों में नरमी बनी रह सकती है।

–आईएएनएस