तितरफा संकट से घिरा देश, अभी नहीं संभले तो बेकाबू हो जाएगी स्थिति : मनमोहन


नई दिल्ली (ईएमएस)। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने कहा देश के सामने इस समय तितरफा खतरा मंडरा रहा है एक ओर सामाजिक सौहार्द का विघटन हो रहा है, तो दूसरी ओर आर्थिक मंदी बड़ा संकट बन गई है। तीसरे कोरोना के रूप में वैश्विक स्वास्थ्य समस्या आ खड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी को ‘देश को अपने शब्दों से ही नहीं, कृत्यों से भी भरोसा दिलाना होगा कि वह हमारे सामने मौजूद खतरों से परिचित हैं और उन्हें उनसे मुक्ति दिलाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि अभी नहीं संभले तो स्थिति बेकाबू हो जाएगी।
मनमोहन सिंह ने अपने एक आलेख में कहा कि देश की मौजूदा स्थिति ‘भयावह है। वर्ष 2004 से 2014 तक के 10 साल देश के प्रधानमंत्री रहे डॉ मनमोहन सिंह ने कहा, कि देश गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। यह स्थिति ज्याजा देर तक जारी रही तो देश का ढ़ांचा चरमरा जाएगा और हमारी वैश्विक छवि को भारी नुकसान पहुंचेगा।

दिल्ली के कुछ हिस्सों में पिछले सप्ताह हुई हिंसा का ज़िक्र करते हुए डॉ सिंह ने कहा कि ‘हमारे समाज के उद्दंड वर्ग, जिसमें राजनेता भी शामिल रहे, द्वारा साम्प्रदायिक तनाव को हवा दी गई, और धार्मिक असहिष्णुता की आग को भड़काया गया। कानून एवं व्यवस्था से जुड़ी संस्थाओं ने नागरिकों और न्याय संस्थानों की रक्षा के अपने धर्म को छोड़ दिया। इससे सामाजिक सौहार्द्र को गहरी चोट लगी। उन्होंने कहा कि इस संकट को वही लोग सुलझा सकते हैं, जिन्होंने इसे भड़काया है।

डॉ मनमोहन सिंह ने कहा छटपटाती अर्थव्यवस्था के दौर में इस तरह की सामाजिक अशांति के असर से मंदी को गति ही मिलेगी। आर्थिक विकास का आधार होता है सामाजिक सद्भाव, और इस समय वही खतरे में है। टैक्स दरों को कितना भी बदल दिया जाए, कॉरपोरेट वर्ग को कितनी भी सहूलियतें दी जाएं, भारतीय तथा विदेशी कंपनियां यहां निवेश नहीं करेंगी, जब तक हिंसा के अचानक भड़क उठने का खतरा बना रहेगा। पूर्व प्रधानमंत्री ने सरकार के लिए तीन-सूत्री योजना का सुझाव दिया है – सबसे पहले, सरकार को सारी ताकत और प्रयास कोरोनावायरस को काबू करने पर लगा देने चाहिए और पर्याप्त तैयारी करनी चाहिए। दूसरे, नागरिकता संशोधन कानून को बदला जाना चाहिए या वापस लिया जाना चाहिए, ताकि ज़हरीला हो चुका सामाजिक वातावरण खत्म हो व देश में एकता बहाल हो। तीसरे, विस्तृत तथा सटीक वित्तीय योजना लागू की जाए, ताकि खपत बढ़े और अर्थव्यवस्था में सुधार आए।