बाईक बोट कंपनी के सूत्रधार संजय भाटी का आत्मसमर्पण, अब खुलेगा करोडों की धोखाधड़ी का कच्चा चिठ्ठा


दिल्ली-यूपी सहित कई राज्यों के 7 लाख लोगों से ठग लिए 4200 करोड़ 

(PC : PoliceNewsUP.com)

नई दिल्ली (ईएमएस)। जीआइपीएल बाइक बोट कंपनी के मालिक संजय भाटी ने पौंजी स्कीम में लोगों को घर बैठे करोड़ों रुपये कमाने का सपना दिखाकर ठगी का जाल बुना था। उसने 3-3 के गुणक में निवेशकों की लंबी चेन जोड़ ली। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा व पंजाब के कई शहरों में उसने फ्रेंचाइजी खड़ी कर दी। फ्रेंचाइजी हेडों को फॉरच्यूनर गाड़ी तक इनाम में दी। चेन जोड़कर धोखाधड़ी से पैसे कमाने का यह आइडिया प्रबंधन (एमबीए) शिक्षा प्राप्त युवकों ने दिया था। प्रबंधन गुरुओं के आइडिया पर ही संजय भाटी ने 7 लाख से अधिक लोगों को अपने जाल में फंसा कर उनकी गढ़ाई कमाई को लूट लिया। धनराशि को 1 साल में दोगुना करने के चक्कर में लोग संजय भाटी के बुने जाल में फंसते चले गए। पुलिस को उसके कार्यालय से अब तक करीब सवा दो लाख निवेशकों के पैनकार्ड व आधार कार्ड मिल चुके हैं। पुलिस का मानना है कि यह संख्या अभी और ऊपर जाएगी। वहीं, अपुष्ट रूप से कहा जा रहा है कि घोटाला ४२०० करोड़ रुपये से अधिक का है।

संजय भाटी के खिलाफ पुलिस में सैंकडों मामले दर्ज होने और पुलिस का शिंकजा कसता देख शुक्रवार को उसने ग्रेटर नोयडा जिला अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। संजय भाटी के खिलाफ जो मुकद्दमे दर्ज हैं उसमें वह फरार चल रहा था। पुलिस ने गुरुवार को कंपनी के निदेशक विजय पाल कसाना को गिरफ्तार किया था।

संजय भाटी की बाईक बोट कंपनी की कहानी

संजय भाटी ने मेरठ से ठगी का कारोबार शुरू किया था। उसने प्रत्येक निवेशक को तीन और नए निवेशक जोड़ने पर प्रति बाइक तीन हजार रुपये का कमीशन देने का लालच दिया। इससे निवेशकों की चेन लंबी होती चली गई। वह निवेशक से बाइक नहीं लेता था, बल्कि बाइक के लिए चेक से पैसा लेता था। एक बाइक के लिए निवेशक से ६२१०० रुपये लिए जाते थे। इसके बदले निवेशक को प्रति माह ९७६५ रुपये की किस्त दी जाती थी। निवेशक को १२ महीनों में ११७१८० रुपये देने का सपना दिखाया गया।

शुरुआती सदस्यों का विश्वास जीत का बुना जाल

जानकारों का कहना है कि शुरुआती दौर में पैसा लगाने वाले निवेशकों को तय वादे के मुताबिक एक साल में निर्धारित धनराशि दी गई। इससे अन्य निवेशकों में कंपनी के प्रति विश्वास बढ़ता चला गया। जिन लोगों को निर्धारित अवधि में अपनी धनराशि दोगुनी मिल गई, उन्हें संजय भाटी ने फ्रेंचाइजी से जोड़ लिया, ताकि वे नए निवेशक ला सकें। पौंजी स्कीम के तहत लाखों निवेशकों के साथ करोड़ों की ठगी करने वाले बाइक बोट कंपनी का फ्रेंचाइजी हेड विजय पाल कसाना का कंपनी में कद दूसरे नंबर का था।

पुलिस सूत्रों की माने तो आरोपित से संजय भाटी के संबंध में पूछताछ की तो उसने अप्रैल से संपर्क न नहीं होने की बात कही। वहीं, हड़पे गए रुपयों के संबंध में उसने कहा कि रुपये कंपनी के खाते में जाते थे। पूछताछ के दौरान कुछ अन्य आरोपितों के संबंध में पुलिस को जानकारी मिली है। जिनकी गिरफ्तारी में पुलिस जुट गई है।

पाप छुपाने राजनीतिक चोला ओढ़ने वाला था

गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड की बाइक बोट नाम से कंपनी बनाकर संजय भाटी चंद दिनों में ही अरबपति बन गया। लाखों लोगों को घर बैठे कमाई का लालच देकर अपने जाल में फांस लिया और उनकी गाढ़ी कमाई को डकार लिया। अरबपति बनने के बाद संजय भाटी राजनीति में घुसपैठ कर खुद को कानूनी शिकंजे से बचाने की योजना तैयार कर रहा था। इसलिए उसने नेताओं के साथ उठना-बैठना शुरू कर दिया था। रुपये की चकाचौंध दिखाकर वह राजनीति गलियारे में घुसने में सफल भी हो गया। लोकसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी ने गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट के प्रभारी वीरेंद्र डाढ़ा को हटाकर संजय भाटी को जिम्मेदारी सौंपी थी। इससे यह चर्चा जोर पकड़ गई कि गौतमबुद्ध नगर सीट से वह बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में कूदने को तैयार है। क्षेत्र में रसूख बढ़ाने के लिए उसने प्रचार पर करोड़ों खर्च कर जगह-जगह अपने होर्डिंग लगवा दिए। लेकिन उसकी यह चाल कामयाब नहीं हुई। टिकट मिलने से पहले ही संजय भाटी के घोटालों का जिन्न बाहर आने लगा। बसपा ने संजय भाटी को बाहर का रास्ता दिखाया और सतबीर नागर को प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतार दिया।

लाखों निवेशकों को लगाया चूना

संजय भाटी को फलने फूलने में उसे संरक्षण देने वालों की अहम भूमिका रही। लाखों निवेशकों को चूना लगाने के बावजूद उसके खिलाफ दर्ज मामले काफी कम हैं। बताया जाता है कि करीब सात लाख निवेशक उसकी धोखाधड़ी के शिकार हुए है। संजय भाटी के नेताओं व अधिकारियों में साठगांठ की वजह से उसके खिलाफ अधिकतर शिकायतों पर मुकदमे दर्ज नहीं हुए। बाइक बोट की तर्ज पर जिले में कई अन्य कंपनियां भी निवेशकों से ठगी का धंधा चला रही हैं।

पिछले दिनों सेक्टर ५७ में संचालित होने वाली एक कंपनी द्वारा बाइक बोट की तर्ज पर ही हजारों निवेशकों से करोड़ो रुपये की ठगी कर फरार हो गई थी। उस कंपनी ने बाइक यात्र, ई-सारथी व एयर प्यूरीफायर सहित अन्य लुभावनी स्कीम का झांसा देकर ठगी को अंजाम दिया था। कंपनी ने १२ महीने में दोगुनी रकम मिलने के साथ नेटवर्क मार्केटिंग की तरह अपने नीचे लोगों को जोड़ कर मोटा कमीशन का लालच दिया था। ठगी के शिकार हुए लोगों ने मार्च के अंतिम सप्ताह में कोतवाली सेक्टर ५८ पहुंच कर शिकायत की थी। उस दौरान निवेशकों ने इस कंपनी द्वारा कई राज्यों के हजारों निवेशकों से ५० करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की आशंका जताई थी।

फर्जीवाड़े की जांच नोएडा आर्थिक अपराध शाखा (एनईओडब्ल्यू) को दी गई थी। एनईओडब्ल्यू की तरफ से हुई प्राथमिक जांच के बाद अप्रैल माह में एमआइपी बाइक-एमआइपी कैब-ई सारथी कंपनी से जुड़े १५ लोगों के खिलाफ कोतवाली सेक्टर ५८ में एफआइआर दर्ज की गई थी। उस दौरान ७० निवेशकों की तरफ से पुलिस शिकायत की गई थी। वहीं एसएसपी का का कहना है कि बाइक बोट की तर्ज पर हुए एक अन्य फर्जीवाड़े के मामले में भी नोएडा में एफआइआर दर्ज है। उस मामले में भी जांच चल रही है। जिन निवेशकों ने चेन जोड़कर ११ बाइकों के पैसे दिए, उन्हें प्रति बाइक तीन-तीन हजार का कमीशन देने के अलावा गर्भित बाजार में शापिंग का भी लालच दिया गया। संजय भाटी ने गर्भित बाजार खोलने की भी योजना बनाई थी, लेकिन उससे पहले ही उसका फर्जीवाड़ा खुल गया। जिन निवेशकों ने लोगों की चेन जोड़कर एक-एक करोड़ रुपये संजय भाटी को दिए, उन्हें बाइक बोट कंपनी की तरफ से एक फॉरच्यूनर गाड़ी इनाम में दी गई। हालांकि, गाड़ियां कंपनी के नाम से ही खरीदी गईं।