चीन के इस शहर में धूल खाती पड़ी लाखों साइकिलों से परेशान लोग


(PC : globaltimes.cn)

चीन में एक शहर है वॉन्गक्वीनटाऊ। यह शहर साईकिल बनाने की फैक्ट्रियों के लिये मशहूर था। यहां बनने वाली साइकिलें चीन के लोग चलाते और सस्ते में अपना सफर तय करते।

न्यूयोर्क टाईम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंटरनेट के वर्तमान युग में साइकल की लोकप्रियता को भुनाने के लिये साईकिल शेयर करने वाले स्टार्टअप की कतार लग गई। यकायक लॉंच हुए इन स्टार्टअप के कारण साईकिलों की मांग आसमान छूने लगी। नये-नये स्टार्टअप कारोबारों में करोडो का निवेश करने वाले बड़े निवेशक मानो कोरा चैक लेकर घूमते। इसके चलते एक-एक बाद एक नई नई कंपनियां खुलती चली गई। प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई कि कंपनियों के पास इस बात की भी सोच नहीं रही कि धंधे में आखिर मुनाफा कैसे होगा? साईकल शेयरिंग का करोबार करने वाली ऑफो, मोबाईक और ब्लूगोगो जैसी कंपनियों ने तो अपनी साईकिलों का विशेष रंग भी चुना हुआ था, जो क्रमशः येलो, ओरेंज और ब्लू थे।

लेकिन फिर अधिकांश साईकल शेयररिंग का कारोबार करने वाली कंपनियों को भारी नुकसान होने लगा। कंपनियां मंदी के गर्त में समाई, तो वॉन्गक्वीनटाऊ शहर में साइकल बनाने वाली कंपनियों में ताले लग गये, बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो गये। अब इस शहर के कारखानों के गोदामों, खुले मैदानों पर भूरे और हलके हरे रंग की साईकलें धूल खाती पड़ी हैं।

 

भारत में भी दूसरों की देखा-देखी नये-नये स्टार्टअप शुरु हो रहे हैं। जितने नये इंटरनेट और मोबाईल एप आधारित कारोबार शुरू हो रहे हैं, उतने ही पुराने बंद भी हो रहे हैं। ऐसे में चीन के इस साईकल कारोबार के उतार और चढ़ाव से सबक लेने की जरूरत है। कारोबारियों को ध्यान में रखना चाहिये कि सिर्फ पैसे के बल पर ग्राहक प्राप्त करने की गणित पर आधारित नहीं अपितु धंधा वो ही अच्छा जिसकी मुनाफा दे सकने की क्षमता हो।