3 साल में डूबा 29 बैंकों को 1.14 लाख करोड़ का कर्ज, दोषी कौन ?


– सिर्पâ कारोबारियों को बैड लोन के लिए दोषी ठहराया जा रहा है- एसोचैम
नई दिल्ली । सरकार ने माना है कि देश के २९ सरकारी बैंकों का १.१४ लाख करोड़ रुपये का कर्ज महज ३ साल में ही डूब गया है। इतना ही नहीं पिछले १० साल के डूबे कर्ज का ५० फीसदी पिछले ३ साल में रहा है। आरबीआई द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर २०१५ तक बैंकों का एनपीए ४.४ लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया जो सरकारी बैंकों के डूबे कर्ज उनके नेटवर्थ का करीब १.५ गुना है।
२९ सरकारी बैंकों की इतनी बड़ी राशि के डूब जाने पर सवाल उठना लाजिमी है कि बैंकों के इस डूबते कर्ज का गुनहगार है कौन? ये सवाल अब इसलिए बड़ा हो गया है क्योंकि एसोचैम ने बकायदा एक विज्ञापन देकर अपील की है सिर्पâ कारोबारियों को बैड लोन के लिए दोषी ठहराया जा रहा है। इससे पहले वित्त मंत्री और आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन कह चुके हैं कि हर बैड लोन को डिफॉल्ट कहना सही नहीं है। तो सवाल ये है कि बैंकों में देश की जनता का इतना जमा पैसा डूबा है तो दोषी कौन-कौन है?
गौरतलब है कि संसद से लेकर प्रेस कांप्रेâस में सरकार और बैंकों के प्रतिनिधि कर्ज डूबने के पीछे के तमाम कारणों को गिनाते रहें हैं । जैसे कि वंâपनियों ने डबल डिजिट ग्रोथ की उम्मीद में कर्ज लिया, कई वंâपनियों ने अपनी क्षमता से ज्यादा विस्तार किया, लेकिन सही समय पर प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पाए। राजनीतिक दबाव की वजह से भी उलटे-सीधे लोन बंटे, बैंक बड़े डिफॉल्टरों से लोन वसूलने में नाकाम रहे हैं। कई वंâपनियों ने कर्ज में घोटाला किया, यानि कि वंâपनियों ने कर्ज के पैसे का निजी इस्तेमाल किया।
सिबिल के मुताबिक ३१ दिसंबर २०१५ तक बैंकों के विलपुâल डिफॉल्टर के कुल ६२५१ मामले सामने आए और इसका आंकड़ा ५७७९५ करोड़ रुपये है। इसमें एसबीआई के १२०९१ करोड़ रुपये के कुल १०३४ मामले हैं, जबकि पीएनबी के ९४४५ करोड़ रुपये के ६९८ मामले हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के ३५७४ करोड़ रुपये के ६३९ मामले हैं। ओबीसी के ३५४६ करोड़ रुपये के ३३९ करोड़ रुपये के मामले हैं। यूनियन बैंक के २९९१ करोड़ रुपये के ६११ मामले हैं।
-बढ़ता ही जा रहा है डूबंत कर्ज
बैंकों के ग्रॉस एनपीए पर भी कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। सितंबर-२०१५ तिमाही में पीएनबी का ग्रॉस एनपीए ६.३६ फीसद से बढ़कर ८.४७ फीसदी हो गया। जबकि देना बैंक का ग्रॉस एनपीए ६.८४ फीसद से बढ़कर ९.८५ फीसद हो गया। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का ग्रॉस एनपीए ६.८६ फीसद से बढ़कर ८.९५ फीसदी हो गया। आईसीआईसीआई बैंक का ग्रॉस एनपीए ३.७७ फीसद से बढ़कर ४.७२ फीसद, एाqक्सस बैंक का ग्रॉस एनपीए १.३८ फीसद से बढ़कर १.६८ फीसद, और एचडीएफसी बैंक का ग्रॉस एनपीए ०.९१ फीसद से दिसंबर-२०१५ तिमाही में बढ़कर ०.९७ फीसद हो गया।