वॉट्सऐप से टेलीकॉम कंपनियों की कमाई में सेंध लगने का खतरा बढ़ा


नई दिल्ली । दुनिया भर में लोकप्रिय मेसेिंजग ऐप वॉट्सऐप ने प्रâी कॉिंलग के जिस फीचर को पेश किया है, उससे देश की टेलीकॉम वंâपनियों की कमाई में सेंध लगने का खतरा बढ़ गया है। डोमोqस्टक लेवल पर टेलिकॉम वंâपनियों को लंबी दूरी की एसटीडी कॉलों से इसकी कुल कमाई का ५वां हिस्सा प्राप्त होता था। लेकिन वॉट्सऐप के इस फीचर के लांच होने के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि एसटीडी से होने वाली टेलीकॉम वंâपनियों की कमाई बंद हो जाएगी। इससे पहले भी वाइबर और स्काइप जैसी ओटीटी मेसेिंजग र्सिवसेज प्रâी कॉिंलग र्सिवसेज प्रदान कर रही थीं लेकिन यह र्सिवस सिर्पâ इंटरनेशनल कॉिंलग तक ही मुख्य रूप से सीमित थी। वैसे भी इंटरनेशनल कॉिंलग से भारतीय टेलिकॉम वंâपनियों को कोई खास कमाई नहीं होती है, इसलिए वाइबर या स्काइप के प्रâी कॉिंलग फीचर से इनको कोई खतरा नहीं था। मोबाइल ऑपरेटरों को इंटरनेशनल कॉिंलग से १० फीसदी से भी कम कमाई होती है और १८-२० फीसदी कमाई डोमोqस्टक लेवल पर लंबी दूरी की एसटीडी कॉल्स से होती है।
प्रâी मेसेिंजग ऐप के आने से पहले ही टेलिकॉम वंâपनियों को झटका लगा था क्योंकि एसएमएस से होने वाली उनकी कमाई लगभग बंद हो गई थी। उसके बाद अब प्रâी कॉिंलग र्सिवस ने उन पर और प्रहार किया है। इस कारण ही टेलिकॉम वंâपनियां ओटीटी ऑपरेशंस को रेग्युलेशन के दायरे में लाने की मांग कर रही हैं। अपने बचाव में ओटीटी र्सिवसेज प्रदान करने वालों का कहना है कि अगर टेलिकॉम वंâपनियों की वॉइस कॉल से कमाई कम हुई है तो वे वॉट्सऐप और वाइबर जैसी र्सिवसेज के माध्यम से डेटा बेचकर कमाई तो कर ही रही हैं। कुछ हद तक ओटीटी ऑपरेटर्स की बात तो सही है लेकिन सच तो यह है कि इससे टेलिकॉम वंâपनियों की वाकई में कमाई प्रभावित हो रही है।