वाइब्रेंट जैसे सम्मेलन पर्याप्त नहीं जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव जरूरी : उद्योग जगत


मेक इन इंडिया के लिए हर साल चाहिए ८०० अरब डॉलर
– वाइब्रेंट सम्मेलन में प्रतिनिधियों ने रखे बेबाकी से विचार
गांधीनगर। वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में विदेश से हिस्सा लेने पहुंचे उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने बेबाकी से अपनी राय रखते हुए कहा कि भारत में विदेशी निवेश लाने के लिए ऐसे वाइब्रेंट सम्मेलनों का आयोजन काफी नहीं होगा। इसके लिए मोदी सरकार को जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव लाने होंगे। देशी विदेशी प्रतिनिधियों ने सरकार, आरबीआई के सामने अपनी बात को साफ रखते हुए कहा कि मोदी सरकार को गला घोटू लालफीताशाही व्यवस्था को खत्म करना होगी और अपने कमजोर बुनियादी ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन करने के साथ स्पष्ट नीतियां तैयार करनी होंगी। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कहा कि मेक इन इंडिया के तहत र्आिथक विकास को सात फीसद से ऊपर पहुंचाने का वेंâद्र सरकार का सपना तभी परवान चढ़ेगा जब देश में हर साल ८०० अरब डॉलर (करीब ५० हजार अरब रुपये) का निवेश होगा।
सम्मेलन में हो रहे बड़े-बड़े एलानों के इतर विदेशी प्रतिनिधियों ने अपनी िंचताओं का खुले दिल से इजहार किया। उन्होंने माना कि यह सही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नरमी के बीच निवेश के लिए दुनिया भारत की तरफ देख रही है, लेकिन सुधारों की गति को और तेज करना होगा। रविवार की रात प्रधानमंत्री मोदी की ओर से दिए गए भोज में संभावित निवेशकों और वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच हुई बातचीत में प्रतिनिधियों ने बेझिझक कहा कि वे भारत में कारोबार करना चाहते हैं, लेकिन कुछ बातें उन्हें यहां आने से रोकती हैं। जब तक सरकार कमजोर बुनियादी ढांचे की समस्या को निपटा नहीं लेती उनका संदेह कायम रहेगा। विदेशी उद्योगपतियों की सरकार से और ज्यादा अपेक्षाएं हैं।
गौरतलब है कि दो दिवसीय वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन के समापन पर वेंâद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सार्वजनिक तौर पर वादा किया कि सरकार पैâसले लेने में तेजी दिखाएगी और कर व्यवस्था को स्थायी बनाया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले दिनों में निवेश की रफ्तार जोर पकड़ेगी। बीते रोज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी निवेशकों को वचन दिया था कि वह पारदर्शी नीतियों को अपनाते हुए भारत में कारोबार करने के लिए माहौल को आसान बनाएंगे।