मौद्रिक नीति से पहले मॉनसून के मिजाज को समझना चाहेगा रिजर्व बैंक


कोाqच्च। खुदरा महंगाई बढ़ने के संकेतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन मंगलवार को द्वैमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा के तहत ब्याज दर में कटौती की दिशा में कोई अगला कदम बढ़ाने से पहले मॉनसून के मिजाज को समझना चाहेंगे। मालूम हो कि मॉनसूनी वर्षा की शुरुआत में इस साल देर हो रही है पर मौसम विभाग और निजी एजेंसियों ने वर्षा सामान्य या उससे ऊपर रहने का अनुमान लगाया है।
गौरतलब है कि राजन ने पिछले साल जनवरी से लेकर अब तक नीतिगत ब्याज दर में कुल मिलाकर १.५ प्रतिशत की ही कटौती की है। पर उनकी आलोचना इसी बात को लेकर हो रही है कि उन्होंने दरों में कमी शुरू करने से पहले जरूरत से ज्यादा समय तक मौद्रिक नीति को सख्त रखा। राजन नीतिगत दरों में कटौती करने के साथ-साथ बैंकों को उसका पूरा फायदा ग्राहकों तक पहुंचान के लिए भी जोर देते आ रहे हैं। इस बार द्वैमासिक समीक्षा के बाद होने वाले गवर्नर के परंपरागत संवाददाता सम्मेलन को भी गौर से देखा जाएगा। क्योंकि उसमें राजन के सेवा काल के विस्तार के बारे में संकेतों को भी खोजा जाएगा। उनका कार्यकाल सितंबर में पूरा हो रहा है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि आरबीआई इस बार यथााqस्थति बनाए रखेगा। क्योंकि मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद के अनुसार ही हैं पर वे बहुत सुखद नहीं कहे जा सकते। उसने कहा कि, `केवल एक ही उत्साहजनक बात है, मॉनसून के अच्छे होने का अनुमान। आरबीआई उसकी प्रगति को देखकर ही कटौती का कोई निर्णय करेगा। जानकारों के मुताबिक कल पेश होने वाली मौद्रिक नीति में नीतिगत दर में कमी किए जाने की संभावना नहीं दिखती। मॉर्गन स्टेनली का भी मानना है कि आरबीआई मॉनसून शुरू होने का इंतजार करेगा और मुद्रास्फीति के वास्तविक रुझानों को देखना चाहेगा।