छोटे कारोबारियों को नहीं देती बैंक सरकारी योजनाओं के तहत लोन


– २०१४ के बाद छोटे कारोबारियों के कर्ज में कमी आई
मुंबई। सरकार के तमाम दावों और योजनाओं के बावजूद बैंक छोटे-मझोले कारोबारियों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं देती। इस वजह से इन कारोबारियों के लिए बैंकों से कर्ज लेना मुाqश्कल होता जा रहा है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इकठ्ठा हुए और कई स्टार्टअप और छोटे कारोबारियों ने सरकार को अपनी दलील पेश कर कर कहा कि हम ना तो अपना बिजनेस ढंग से चला पा रहे हैं और ना ही अपने विस्तार योजनाओं पर काम कर पा रहे हैं।
गौरतलब है कि सरकार ने पिछले दो साल में मुद्रा योजना, स्टैंडअप मित्र और व्रेâडिट गारंटी पंâड जैसी ढेरों स्कीमें लॉन्च तो की हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि बैंक छोटे कारोबारियों को लोन देने से कतराते हैं। खुद आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने माना है कि अप्रैल २०१४ के बाद से सरकारी बैंकों से छोटे कारोबारियों को मिले कर्ज में कमी आई है। विदित हो कि २०१४ के बजट में छोटे-मझोले कारोबारियों के लिए सरकार ने १०,००० करोड़ रुपये के पंâड का ऐलान किया था लेकिन कारोबारियों का कहना है कि वो पैसा अब तक उन तक नहीं पहुंचा है।
देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में बड़ी भूमिका निभाने वाले इन छोटे कारोबारियों को बैंकों से लोन लेना एक अनथक की जाने वाली कसरत से कम नहीं होती। विश्लेषकों का साफ साफ कहना है कि सरकार को सिर्पâ योजनाएं बनाने तक ही सीमित नहीं रहे, उन्हें ढंग से लागू करने का प्रसास भी करे।