सूरत : घोड़े को गाजर खिलाते समय NRI का अंगूठा कटा, चार घंटे की माइक्रो सर्जरी से डॉक्टरों ने बचाया
मांगरोल में हुआ अनोखा हादसा; घोड़े ने गाजर के साथ अंगूठे का हिस्सा भी चबा लिया, समय पर उपचार से मिली सफलता
सूरत। सूरत जिले के मांगरोल गांव में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां घोड़े को गाजर खिलाते समय एक एनआरआई गंभीर रूप से घायल हो गए। घोड़े ने गाजर के साथ उनके दाहिने हाथ के अंगूठे का हिस्सा भी काट लिया।
घायल को तत्काल सूरत के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब चार घंटे तक चली जटिल माइक्रो सर्जरी के बाद अंगूठे को सफलतापूर्वक दोबारा जोड़ दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मूल रूप से मांगरोल निवासी और वर्तमान में यूनाइटेड किंगडम (यूके) में रहने वाले सलीमभाई को घोड़ों का विशेष शौक है। उनके फार्महाउस में चार घोड़े हैं और उनकी देखभाल तथा प्रशिक्षण के लिए वे समय-समय पर भारत आते रहते हैं।
हाल ही में उन्होंने लगभग 12 लाख रुपये की लागत से एक नया घोड़ा खरीदा था और उसी की देखरेख के लिए कुछ दिन पहले यूके से मांगरोल पहुंचे थे।
बताया जा रहा है कि दो दिन पहले दोपहर के समय सलीमभाई अपने फार्महाउस में घोड़े को गाजर खिला रहे थे। इसी दौरान घोड़े ने अचानक गाजर के साथ उनके दाहिने हाथ के अंगूठे का हिस्सा भी काट लिया। घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और परिजन तुरंत उन्हें उपचार के लिए सूरत लेकर रवाना हुए।
घटना के बाद अंगूठे का कटा हुआ हिस्सा घोड़े के मुंह में ही रह गया था। परिवारजनों और फार्म कर्मचारियों ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला।
अंगूठे के कटे हुए हिस्से को तुरंत बर्फ में सुरक्षित रखा गया और मरीज के साथ अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे उसे दोबारा जोड़ने की संभावना बनी रही।
सूरत के अडाजन क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में विशेषज्ञ सर्जनों की टीम ने तत्काल ऑपरेशन शुरू किया। करीब चार घंटे तक चली माइक्रो सर्जरी के दौरान रक्त वाहिकाओं, नसों और ऊतकों को सावधानीपूर्वक जोड़कर अंगूठे को पुनः स्थापित किया गया।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार सर्जरी सफल रही है और मरीज की हालत फिलहाल स्थिर है। डॉक्टरों का कहना है कि कटे हुए अंग को सही तरीके से संरक्षित कर समय पर अस्पताल पहुंचाने से ऑपरेशन की सफलता की संभावना काफी बढ़ गई।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि इस हादसे के बावजूद सलीमभाई का घोड़ों के प्रति प्रेम कम नहीं हुआ है। उन्होंने पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद फिर से अपने घोड़ों की देखभाल स्वयं करने की इच्छा जताई है।
यह घटना इस बात का उदाहरण है कि प्रशिक्षित और पालतू जानवरों के साथ भी पूरी सावधानी बरतना आवश्यक है। साथ ही, समय पर चिकित्सा सहायता और कटे हुए अंग के उचित संरक्षण से गंभीर दुर्घटनाओं में भी अंगों को बचाया जा सकता है।
