उज्ज्वला योजना में बदलाव, अब मिलेंगे सिर्फ 4 सिलेंडर
शुरुआत साल में 12 सिलेंडर देने से हुई थी
नई दिल्ली, 09 जून (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में वंचित परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की थी।
शुरुआत में लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती सिलेंडर दिए जाते थे, जिसे बाद में घटाकर 9 किया गया और अब इसे सिर्फ चार सिलेंडर सालाना करने का फैसला लिया गया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अब पहले की तुलना में कम सिलेंडरों पर वित्तीय सहायता दी जाएगी।
नए नियमों के मुताबिक, लाभार्थियों को अब साल के पहले चार रिफिल पर ही प्रति सिलेंडर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) मिलेगा।
इससे पहले तक इस योजना के अंतर्गत आने वाले लाभार्थियों को साल भर में कुल 9 सिलेंडरों की रीफिलिंग पर यह लाभ दिया जाता था। अधिकारियों का कहना है कि उज्ज्वला योजना वाले एक आम परिवार में औसतन साल भर में लगभग चार सिलेंडरों की ही वास्तविक खपत होती है, इसलिए वित्तीय सहायता को इसी औसत खपत के स्तर के अनुरूप बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा ने स्पष्ट किया कि संशोधित पात्रता पूरी तरह से परिवारों की औसत सालाना गैस खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है।
बता दें कि देश में आम जनता पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में तेल विपणन कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दामों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की थी, जो पिछले तीन महीनों के भीतर दूसरी बड़ी बढ़ोतरी थी।
इस झटके से लोग अभी संभल भी नहीं पाए थे कि सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को एक और बड़ा झटका दे दिया है। इस सरकारी योजना के तहत मिलने वाले रियायती सिलेंडरों की वार्षिक संख्या में बड़ी कटौती करने का फैसला लिया गया है, जिससे गरीब परिवारों के बजट पर सीधा असर पड़ेगा।
प्रत्येक सिलेंडर पर 700/- का घाटा उठा रहीं कपनियां
सिलेंडरों को किफायती बनाए रखने के लिए सरकार ने मई 2022 में 200 रुपये की सब्सिडी शुरू की थी, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया।
यह सब्सिडी हर रिफिल की खरीद के बाद सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाती है। हालिया बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 942 रुपये हो गई है।
इस हिसाब से 300 रुपये की सब्सिडी के साथ उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अपने पहले चार सिलेंडरों के लिए प्रति रिफिल 642 रुपये का भुगतान करना होगा।
आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने 2022 से अब तक सब्सिडी के रूप में 52,000 करोड़ रुपये दिए हैं, जबकि तेल कंपनियां अब भी प्रति सिलेंडर लगभग 700 रुपये का घाटा उठा रही हैं।
