मालदीव में स्थिति बिगड़ी, पूर्व राष्ट्रपति और चीफ जस्टिस गिरफ्तार


मालदीव की सेना ने संसद पर कब्‍जा किया
अमेरिका ने कहा लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करे सेना

माले (ईएमएस)। मालदीव में राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने सोमवार को 15 दिन के आपातकाल का ऐलान कर दिया। इस घोषणा के साथ ही मालदीव में चल रहा सियासी संकट और गहरा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति को राजनीतिक कैदियों को रिहा करने का आदेश दिया था, जिसे उन्होंने मानने से इनकार कर दिया था। इसके बाद ही वहां स्थिति बिगड़नी शुरू हुई थी। मालदीव सरकार ने सुरक्षा बलों को सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मानने का आदेश दिया है। इससे बाद सेना ने पूर्व राष्ट्रपति और चीफ जस्टिस को गिरफ्तार कर संसद पर कब्जा कर लिया है। इस बीच ‘चिंतित’ भारत ने अपने नागरिकों को मालदीव यात्रा टालने की सलाह दी है। उधर अमेरिका ने कहा है कि मालदीव सरकार को कानून का सम्मान करना चाहिए। इस बीच मालदीव में आपातकाल की घोषणा करते हुए पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम समेत मुख्य न्यायाधीश अब्दुल्ला सईद, सुप्रीम कोर्ट के जज अली हमीद और जुडिशल ऐडमिनेस्ट्रेटर हसन सईद के अलावा अन्य जजों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

ज्ञात हो कि मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल को उनसे अलग हो चुके सौतेले भाई और राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन द्वारा देश में आपातकाल लगाए जाने के कुछ देर बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया है। राष्ट्रपति की करीबी अजिमा शुकूर ने सोमवार शाम को टेलिविजन संदेश के जरिए इमर्जेंसी का ऐलान किया। मालदीव के राष्ट्रपति के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी इसकी जानकारी दी गई। इस आदेश के साथ ही मालदीव के नागरिकों के सभी मूल अधिकार निलंबित हो गए हैं और सुरक्षाबलों को किसी को भी संदेह के आधार पर गिरफ्तार करने की शक्ति मिल गई है। इस सूचना के मुताबिक मालदीव के संविधान के अनुच्छेद 253 के तहत अगले 15 दिनों के लिए राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने आपातकाल की घोषणा की है। इस अवधि में नागरिकों के कुछ अधिकार सीमित रहेंगे, लेकिन सामान्य हलचल, सेवाओं और व्यापार पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल की गिरफ्तारी के कुछ देर बाद उनकी बेटी युम्ना मौमून ने ट्विटर पर बताया कि 80 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति को राजधानी माले स्थित उनके घर से ले जाया गया है। मौमून अब्दुल सन 2008 में देश का पहला लोकतांत्रिक चुनाव होने से पहले 30 वर्ष तक देश के राष्ट्रपति रहे। मौमून अब्दुल विपक्ष के साथ थे और अपने सौतेले भाई को पद से हटाए जाने को लेकर अभियान चला रहे थे। भारत ने हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जाहिर की और अपने नागरिकों से अगली सूचना तक हिंद महासागर के इस देश की सभी गैरजरूरी यात्रा टालने को कहा है।

परामर्श में विदेश मंत्रालय ने मालदीव में भारतीय प्रवासियों को भी सुरक्षा के बारे में चौकस रहने और सार्वजनिक स्थानों पर जाने और जमा होने से बचने को कहा है। इससे पहले इस संकट पर प्रतिक्रिया करते हुए भारत ने कहा था कि मालदीव सरकार के सभी अंग देश के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के प्रति बाध्य हैं। आपातकाल के ऐलान पर अमेरिका ने भी प्रतिक्रिया की है। अमेरिका ने अपने एक बयान में कहा है कि संकट की इस घड़ी में अमेरिका मालदीव के लोगों के साथ है। मालदीव की सरकार और सेना को कानून, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थानों का का सम्मान करना चाहिए। दुनिया देख रही है।