`इस्लाम के अपमान’ के मामले में मिस्र की लेखिका पर केस


काहिरा। मिस्र के एक वकील ने ईद-अल-अजहा के दौरान बड़े पैमाने पर कुर्बानी की आलोचना कर एक लेखिका पर इस्लाम का अपमान करने का आरोप लगाया है और उसके खिलाफ मुकदमा चलाने की अपील की है।
एक न्यायिक अधिकारी का कहना है कि फातिमा नउत ने अत्तूâबर में ईद-अल-अजहा के अवसर पर अपने पेâसबुक पेज पर लिखा था, “संहार मुबारक हो”। ईद-अल-अजहा मुसलमानों का कुर्बानी का त्योहार है। अपने बेटे की बलि देने के खुदा के निर्देश का पालन करने की हजरत इब्राहीम की प्रतिबद्धता को याद में ईद-अल-अजहा के मौके पर जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। खुदा ने अंत में उसे एक भेड़ दी थी। नउत, एक मुाqस्लम हैं और अपने पोस्ट पर विवाद पैदा होने के बाद उन्होंने पेâसबुक से उसे हटा लिया था।
एक न्यायिक अधिकारी का कहना है कि पूछताछ के दौरान नउत ने माना है कि उन्होंने इन्हें लिखा था। अधिकारी ने एएफपी को बताया कि ५० वर्षीय स्तंभकार ने इस बात से इंकार किया है कि उनका इरादा इस्लाम का अपमान करने का था। इसके साथ ही अधिकारी ने यह भी बताया लेखिका पर `कुर्बानी के अधिकार का मजाक उड़ाने’ का भी आरोप लगाया गया है। अगले साल २८ जनवरी को शुरू होने वाले मुकदमे की जानकारी मिलने के बाद नउत ने शुक्रवार को लिखा कि `यह वह कीमत है, जो ज्ञान की मशाल लेकर चलने वाले वाले लोगों को हर दौर में चुकानी पड़ती है।” लेखिका ने कहा कि अत्तूâबर में उन्होंने ईद-उल-अजहा के मौके पर मुाqस्लमों को मुबारकबाद देने के लिए पेâसबुक पर संदेश पोस्ट किए थे लेकिन “उनसे अपील की थी कि वे कुर्बान का सम्मान करें और इसे जानवरों का खून बहाकर अपमानित न करें।” मिस्र का संविधान राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त तीन एकेश्वरवादी धर्मों- इस्लाम धर्म, इसाई धर्म और यहूदी धर्म के अपमान को अवैध मानता है। इस साल के प्रारंभ में एक महिला कॉाqप्टक ईसाई शिक्षिका को छह माह की जेल की सजा सुनाई गई थी। इस शिक्षिका पर उसके छात्रों के माता-पिता ने आरोप लगाया था कि वह अपने धर्म का प्रचार कर रही हैं और इस्लाम का अपमान कर रहे हैं। जून में, एक अन्य मामले में एक मिस्री ईसाई को इस्लाम का अपमान करने के लिए ६ साल की वैâद सुनाई गई थी।