क्या गीता, कुरान और बाइबल पर लगेगा टैक्स?


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जीएसटी कोर्ट के फैसले से उठा सवाल

नई दिल्ली। आध्यात्मिक ज्ञान जरूरी नहीं कि टैक्स से मुक्त हो, इस पर महाराष्ट्र में जीएसटी कोर्ट ने फैसला दिया है कि अब धार्मिक ग्रंथ, धार्मिक मैगजीन और डीवीडी के साथ-साथ धर्मशाला और लंगर जीएसटी के दायरे में हो। कोर्ट की दलील है कि इन वस्तुओं की बिक्री एक कारोबार है और इन्हें खैरात मानते हुए टैक्स से मुक्त नहीं किया जा सकता है।

महाराष्ट्र की कोर्ट के पास टैक्स संबंधी यह मामला श्रीमद राजचंद्र आध्यात्मिक सत्संग साधना केन्द्र के खिलाफ आया। कोर्ट के सामने संस्था ने दलील दी कि उसका प्रमुख काम धार्मिक और आध्यात्मिक शिक्षा का प्रसार है लिहाजा उसके काम को कारोबार की संज्ञा नहीं दी जानी चाहिए।

गौरतलब है कि सीजीएसटी एक्ट के सेक्शन 2(17) के तहत यदि धर्म से जुड़े ट्रस्ट किसी काम का सहारा लेते हैं जहां किसी वस्तु अथवा सेवा के लिए पैसा लिया जाता है तो उस कारोबार की श्रेणी ने रखाकर इसपर 18 फीसदी की दर से जीएसटी वसूला जाएगा। अपनी दलील के साथ संस्था ने दावा किया कि धार्मिक प्रसार के अपने प्रमुख दायित्व को निभाने में वह धार्मिक ग्रंथ,मैगजीन,म्यूजिक सीडी सहित धर्मशाला और लंगर लगाने के काम को करता है, लिहाजा उस जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाए। श्रीमद राजचंद्र आध्यात्मिक सत्संग साधना केन्द्र की दलील पर गौर करने के बाद महाराष्ट्र की जीएसटी कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि शिविर सत्संग धर्मार्थ संस्था के तौर पर इनकम टैक्स के सेक्शन 12 एए के तहत रजिस्टर्ड है। ऐसी स्थिति में उसके धर्मार्थ कामों को जीएसटी के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता है।

गौरतलब है कि जीएसटी एक्ट में महज धार्मिक किताबों का जिक्र किया गया है। लेकिन धार्मिक किताब को किसी तरह से वर्गीकृत नहीं किया गया है। लिहाजा, ऐसी स्थिति में साफ है कि महाराष्ट्र के इस फैसले के बाद यदि कोई धार्मिक संस्था अथवा ट्रस्ट धार्मिक ग्रंथों की बिक्री करती है तो उस जीएसटी अदा करना होगा। हालांकि एक्ट में जिक्र है कि यदि कोई संस्था ग्रंथ/किताब/मैजगीन को किसी पब्लिक लाइब्रेरी के तहत लोगों के उपयोग के लिए रखती है तो ऐसी स्थिति में उस जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाएगा। लिहाजा, अब कोई धार्मिक संस्था श्रीमद भागवत गीता, कुरान अथवा बाइबल जैसे धार्मिक ग्रंथों की बिक्री करता है तो उस जीएसटी के दायरे में रखा जाएगा।