अब लजीज व्यंजनों के साथ बर्तन भी खाएं, कचरा फैलने से बचाएं


अब लजीज व्यंजनों के साथ बर्तन भी खाएं यह बात सुनने में शायद अजीब लग सकती हैं लेकिन दसवीं कक्षा की छात्रा पेंसी ने यह कर दिखाया है।
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जालंधर । अब लजीज व्यंजनों के साथ बर्तन भी खाएं यह बात सुनने में शायद अजीब लग सकती हैं लेकिन हिसार शहर की दसवीं कक्षा की छात्रा पेंसी ने यह कर दिखाया है। अपनी सहपाठी साक्षी के साथ आइसक्रीम खाते हुए पेंसी ने इस आइडिया पर काम किया कि जब कोन में आइसक्रीम खाकर कोन को भी खा सकते हैं तो क्यों न ईटेबल बर्तन बनाए जाएं जिसमें मनचाहे व्यंजनों का स्वाद चखने के बाद बर्तन भी खा लिए जाएं। पेंसी ने सोचा इसके दो फायदे होंगे पार्टियों के बाद आसपास के क्षेत्र में गंदगी भी नहीं दिखेगी, पौष्टिक भोजन भी मिल जाएगा। बस इसी सोच ने पेंसी को इनोवेटर बना दिया। इसके बाद पेंसी ने साक्षी के साथ मिलकर ईटेबल प्लेट और चम्मच बना दिए। इतना ही नहीं इस प्रोजेक्ट को पेंसी ने इंडियन साइंस कांग्रेस के लिए भेजा तो चयन कर लिया गया। परिणामस्वरूप वे इन दिनों इंडियन साइंस कांग्रेस में लगी प्रदशर्नी में अपने ईटेबल बर्तनों के साथ यहां आने वाले हर किसी को आकर्षित कर रही हैं।

पेंसी बताती हैं कि चावल,गेहूं व ज्वार से तैयार ईटेबल (खाने योग्य) बर्तनों का छह महीने तक इनका कुछ खराब नहीं होता है। इन बर्तनों में गर्मागर्म सब्जियां, रायता, सूप, चाय, कॉफी सब कुछ परोसा जा सकता है। पौष्टिक बनाने के लिए ईटेबल बर्तनों में पेंसी ने हल्के मसालों का प्रयोग किया है, वहीं ईटेबल बर्तनों को स्वादिष्ट बनाने के लिए चॉकलेट का भी टेस्ट दिया है, ताकि टेस्ट के अनुसार लोग इस प्रयोग कर सकें। सर्वे व सीनियर्स की मदद से जो आंकडे पेंसी ने एकत्रित किए हैं उसके अनुसार ईटेबल बर्तनों का प्रयोग करके 1000 लोगों की पार्टी के बर्तनों को धोने के लिए प्रयोग होने वाला 4 से 5 हजार लीटर पानी बचाया जा सकता है। इसके साथ ही 20-25 लीटर तक बर्तन धोने वाले लिक्विड की बचत होगी। इसके अलावा 2500 डिस्पोजेवल प्लेट व ग्लास का प्रयोग होने से बचेगा और कचरा भी नहीं होगा। पेंसी बताती हैं कि हिसार के विद्या देवी जिंदल स्कूल की वे छात्रा हैं, स्कूल में होने वाला पार्टियों में ईटेबल बर्तनों का प्रयोग किया जा रहा है जो लोगों को खूब पसंद आ रहा है। ईटेबल बर्तन बनाने का काम तमाम लोगों को रोजगार भी दे सकता है।

– ईएमएस