फोन का हिस्सा नहीं बैटरी चार्जर


० उच्चतम न्यायालय ने माना बैटरी चार्जर अलग उत्पाद

नईदिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि बैटरी चार्जर पर कर लगाने के संदर्भ में सेल फोन का समेकित हिस्सा नहीं माना जा सकता है, बल्कि यह अलग उत्पाद है जिसे अलग से बेचा जा सकता है। न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर की खंडपीठ ने इस व्यवस्था के साथ ही पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का निर्णय निरस्त कर दिया। उच्च न्यायालय ने नोकिया इंडिया प्रायवेट लिमिटेड के इस तर्क को स्वीकार कर लिया था कि सेल फोन का बैटरी चार्जर एक समेकित पैकेज के रूप में बेचा जाता है और चार्जर को कर की रियायती दर से अलग नहीं किया जा सकता। शीर्र्ष अदालत ने मूल्य संवर्धित कर न्यायाधिकरण के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें हैंड सेट और चार्जर को अलग अलग उपकरण मानने के कर अधिकारियों के निर्णय से सहमति व्यक्त की गई थी।
न्यायाधीशों ने कहा कि कर निर्धारण प्राधिकार, अपील प्राधिकार और न्यायाधिकरण ने सही व्यवस्था दी है कि मोबाइल फोन का चार्जर सेल फोन का अतिरिक्त उपस्कर है और वह सेल फोन का हिस्सा नहीं है। न्यायालय ने कर से संबंधित मामले में यह व्यवस्था दी और कहा कि न्यायाधिकरण ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि नोकिया की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनी हमेशा ही मोबाइल बैटरी चार्जर को अतिरिक्त उपस्कर की Ÿोणी में रखती है जिससे सामान्य बोलचाल में मोबाइल बैटरी चार्जर अतिरिक्त उपस्कर ही समझा जाता है।