137 साल पुराने इस डैम से हो रहा पानी का रिसाव


अंग्रेजों ने कराया था इस डैम का निर्माण

नैनीताल (ईएमएस)। भीमताल के 137 वर्ष पुराने डैम से अचानक पानी रिसने के कारण क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल है। लोगों ने सिंचाई विभाग से डैम की मरम्मत करने की मांग की है। डैम से लगभग पांच वर्ष बाद अचानक पानी रिसना दोबारा शुरू हो गया है। इस बार पानी डैम की दीवार की दूसरी तरफ से आ रहा है। इस बार यह पानी चार पांच स्थानों से रिस रहा है। डैम के आसपास के आवासों को खतरा उत्पन्न हो गया है। पांच साल पहले भी डैम से रिसाव शुरू हुआ था।

उस समय सिंचाई विभाग ने मरम्मत कर दी थी। डैम में अत्यधिक पानी होने के कारण दीवारों पर दबाव बढ़ गया है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता डीसी पंत ने बताया कि कई नहरें डैम से संचालित हैं। जिन स्थानों से पानी निकलने की बात की जा रही है, वह पत्थर से निर्मित दीवार है। इसमें चूने का प्रयोग किया गया है। डैम को कोई खतरा नहीं है।

डैम का निर्माण 1880 में अंग्रेजों ने तराई में खेतों की सिंचाई के लिए कराया था। पहले डैम को मिट्टी आदि से निर्मित किया गया था, पर बाद में मिट्टी का डैम टूट जाने के कारण निर्माण भवाली व भीमताल क्षेत्र में पाए जाने वाले पत्थरों से किया गया। चूने के प्रयोग ने इसे कठोरता प्रदान की। डैम को बनाने वाले इंजीनियर सार्प ने जब इसका निर्माण किया, तब इसकी उम्र सौ वर्ष रखी थी। सौ वर्ष से भी अधिक वक्त गुजरने के कारण डैम पर खतरा मंडराने लगा है।