हाईवे पर निजी वाहनों को टोल टैक्स-फ्री करने की योजना


नईदिल्ली। देशभर में राजमार्गों पर निजी वाहनों के साथ ही बसों को भी टोल टैक्स मुक्त किया जा सकता है। केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के नेतृत्व में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय नॉन कॉमर्शियल वाहनों और बसों को टोल टैक्स मुक्त करने की योजना बना रहा है, जिससे वर्ष २०१४ से २०१९ के बीच २७ हजार करोड़ से अधिक रुपए का खर्च आएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गए प्रस्ताव में मंत्रालय ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दाम में १ रु का इजाफा करके और नए निजी वाहनों की खरीद पर एक बार दो फीसदी कर लगाकर टोल टैक्स से होने वाले नुकसान की भरपाई हो सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि नई राजस्व योजना से सरकार को अधिक आय होने की उम्मीद है।

यह छूट दिए जाने के बाद २०१४-१५ के बाद का अनुमान लगाते हुए मंत्रालय ने कहा कि यदि सरकार ये तीन राजस्व योजनाएं स्वीकार कर लेती है, तो उसे ३२ हजार ६०९ करोड़ रुपए की आय होगी। यह वाहनों के टोल से होने वाली अनुमानित आय २६ हजार २९० करोड़ रुपए से अधिक है। सरकार को वर्ष २०१४ से २०१९ के बीच कमर्शियल और नॉन कमर्शियल वाहनों पर टोल के अलावा पेट्रोल व डीजल पर दो रुपए टैक्स लगाने से एक लाख ७२ हजार ८८७ करोड़ रुपए आय होने की उम्मीद है। वहीं, टोल पर टैक्स हटाने के बाद सेस को तीन रुपए करने व नए वाहनों पर दो फीसद सरचार्ज और पुराने वाहनों पर १००० रु कर लगाने पर दो लाख ९ हजार ३४१ करोड़ रुपए की आय होगी।

वर्ष २०१२ के आंकड़ों के अनुसार देश में कुल १५.९४ करोड़ वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें ४८ फीसदी निजी वाहन जैसे कार, टैक्सी, जीप आदि है और ५२ फीसदी अन्य वाहन हैं। साल २०१३-१४ में ११ हजार ४०० करोड़ रुपए टैक्स जमा किया गया था। इसमें से ९,८०० करोड़ रुपए कॉमर्शियल वाहनों से और १,६०० करोड़ रुपए निजी वाहनों से जमा किया गया था। उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में देशभर के कई हिस्सों में खराब रखरखाव वाले टोल नाकों पर कर देने को लेकर ंिहसक घटनाएं देखने को मिली हैं। भारी ट्रैफिक और जबरदस्त विरोध के कारण सरकार को दिल्ली -गुडग़ांव टोल प्लाजा बंद ही करना पड़ा था।