कुछ अच्छा तो कुछ बुरा रहा साल २०१४


  • आतंकियों के नरसंहार, विमान हादसों के दर्द के बीच कैलाश-मलाला ने जगाई शांति की आशा

नईदिल्ली। बीते साल २०१४ में आतंकियों के नरसंहार और विमान हादसों ने दिया दर्द, कैलाश व मलाला ने जगाई शांति की आशा गुजरा साल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई कई हिंसक घटनाओं के कारण याद रखा जाएगा। इस साल के अंतिम पखवाड़े में पाकिस्तान के पेशावर के आर्मी स्वूâल में आतंकियों द्वारा किए गए निरपराध बच्चों के नरसंहार ने एक ऐसा जख्म दिया है जिस पर मरहम लगने में वर्षों लग जाएंगे। वर्ष २०१४ कुछ प्रमुख देशों के बीच हुए हिंसक संघर्षों के लिए और आईएसआईएस जैसे बड़े आतंकवादी संगठन द्वारा इराक और सीरिया में ढाए गए कहर के लिए भी याद रखा जाएगा। इन दुखद घटनाओं के बीच बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले भारत के वैâलाश सत्यार्थी और बच्चों की शिक्षा के लिए आवाज उठाने वाली पाकिस्तान की मलाला युसुफजई को संयुक्त रूप से शांति का नोबल अवार्ड मिलना एक गर्वभरी उपलब्धि रही।

पेशावर में १३२ बच्चों का नरसंहार

पाकिस्तान के पेशावर में १६दिसंबर को तालिबान आतंकवादियों ने आर्मी पब्लिक स्वूâल पर हमला कर १४१लोगों को हत्या कर दी। इसमें से १३२बच्चे थे। यह बच्चों के खिलाफ हुआ अब तक का सबसे बर्बर नरसंहार माना जा रहा है। इन निरपराध बच्चों के माथे पर गोलियां दागी गई। तालिबान आतंकवादियों ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि पाक सेना द्वारा वजीरिस्तान में उनके खिलाफ की गई कार्रवाई के विरोध में इस नरसंहार को अंजाम दिया गया है क्योंकि इस स्वूâल में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों के अभिभावक सेना में कार्यरत हैं। इस नरसंहार की दुनिया भर में निंदा की गई।

कैलाश सत्यार्थी और मलाला को शांति का नोबल

पाकिस्तान के पेशावर में हुए नरसंहार के एक हफ्ते पहले १०दिसंबर को ही भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ता वैâलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला युसुफजई को विश्व के सर्वोच्च सम्मान शांति के नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नार्वे के ओस्लो में हुए भव्य समारोह में इन दोनों को संयुक्त रूप से इस सम्मान से नवाजा गया। मध्यप्रदेश के विदिशा निवासी वैâलाश सत्यार्थी कई सालों से जहां बच्चों के अधिकारों और उनकी बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं वहीं मलाला बच्चों की शिक्षा को लेकर आवाज उठा रही हैं। इसके लिए तालिबान आतंकवादियों ने उन पर जानलेवा हमला तक किया गया था जिसमें वे बमुश्किल बच सकी हैं। इस सम्मान को पाने वाली मलाला सबसे कम उम्र की कार्यकर्ता हैं।

आतंक का पर्याय बनकर उभरा आईएसआईएस

इस साल मध्य एशिया के आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) ने अपना प्रभाव पैâलाते हुए लाखों लोगों पर कहर ढा दिया। इस सुन्नी आतंकी संगठन ने इराक ओर सीरिया के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। इसके कारण इन दोनों देशों के कारण हजारों नागरिक मारें गए और लाखों लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हुए। दुनियाभर में आतंक का पर्याय बना इस्लामिक स्टेट अब दुनिया के सबसे धनी उग्रवादी संगठन के रूप में उभरा है। इस आतंकी संगठन का स्वरूप और प्रभाव भी काफी बड़ा होता जा रहा है।

लापता विमान एमएच ३७० का रहस्य रहा अनसुलझा

मलेशिया के विमान एमएच ३७० के लापता होने का रहस्य अब तक सुलझा नहीं है। हर रोज कोई न कोई दावे किए जा रहे हैं लेकिन विमान के मलबे का कोई अता-पता नहीं है। विमान ८ मार्च को बीिंजग के लिए कुआलालंपुर से उड़ा था मगर बीच में ही लापता गया। इसके बाद विमान को खोजने के लिए सारी कोशिशें कर ली गई पर लापता विमान का कोई सुराग हाथ नहीं लगा। अंत में मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक को घोषणा करनी पड़ी कि लापता विमान एमएच ३७० दक्षिण िंहद महासागर में हादसे का शिकार हो गया है। इसमें सवार सभी यात्रियों को मृत घोषित कर दिया गया। फिर भी यह रहस्य बरकरार है कि आखिर विमान के साथ क्या हुआ था।

यूक्रेन में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी

यूक्रेन में इस साल संकट की शुरुआत उस समय हुई जब वहां के राष्ट्रपति ने यूरोपीय यूनियन से कारोबार संधि तोड़ने का ऐलान करते हुए आरोप लगाया कि यूनियन रूस के इशारे पर चलता है। उनकी इस नीति का सबसे ज्यादा विरोध क्रीमिया प्रांत में हुआ, जहां की आधी से ज्यादा आबादी रूसी है। बाद में यह विरोध सिर्पâ क्रीमिया तक सीमित नहीं रहा बाqल्क यूव्रेâन के अन्य हिस्सों में भी पैâल गया। रातोंरात विपक्ष समेत सैकड़ों प्रदर्शनकारी राजधानी कीव में सड़कों पर उतर आए। पुलिस ने विरोध का दमन करने के लिए प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया जिसके बाद प्रदर्शनकारी और भड़क गए। वहीं, रूस ने यूक्रेन में दखल देने का पैâसला किया और रूसी संसद ने यूक्रेन में फौज भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

एमएच-१७ विमान हादसा

बीते वर्ष मलेशिया एयरलाइन के एक और विमान को हादसे का शिकार होना पड़ा। पूर्वी यूव्रेâन में विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाके में मलेशिया एयरलाइन के एक और विमान एमएच १७ को मिसाइल हमले में मार गिराया गया। मलेशिया एयरलाइन की उड़ान संख्या एमएच १७ में कुल २९८ लोग सवार थे। इस हादसे में करीब दो सौ लोगों की मौत हो गई। मलेशिया एयरलाइन की ओर से जारी यात्रियों की सूची के मुताबिक विमान में नीदरलैंड के १९४, मलेशिया के ४३, ऑस्ट्रेलिया के २७, इंडोनेशिया के १२, ब्रिटेन के दस, जर्मनी के चार, बोqल्जयम के चार और फिलिपींस के तीन नागरिक सवार थे। वहीं, एक-एक नागरिक कनाडा और न्यू़जीलैंड के थे।

नाइजीरिया में बोको हरम का कहर

आतंकी संगठन बोको हरम ने नाइजीरिया में कहर बरपाया। इस संगठन से जुड़े आतंकियों ने अप्रैल माह में बोर्नो प्रांत के चिबोक में ाqस्थत स्वूâल से २२३ छात्राओं को अगवा कर लिया था। इसके बाद बोको हराम के आतंकियों ने दो गांवों से ११ और लड़कियों का अपहरण कर लिया। बोको हराम ने अपहृत छात्राओं को बेचने की धमकी दी है। छात्राओं के अपहरण की घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय आलोचना और नाइजीरिया में विरोध प्रदर्शन हुए और सरकार पर लड़कियों को वापस लाने का दबाव बढ़ा लेकिन इन्हें छुड़ाया नहीं जा सका। इसके बाद यह भी कहा गया कि इन ल़ड़कियों से आतंकियों ने जबरन निकाह कर लिया है। वहीं पूर्वोत्तार नाइजीरिया के एक कस्बे में बोको हराम के आतंकियों ने एक बाजार पर धावा बोलकर तीन सौ लोगों को मौत के घाट उतार दिया। आतंकियों ने यह कहर वैâमरून सीमा के निकट ाqस्थत गांबरू कस्बे के लोगों पर ढाया।

हांगकांग में लोकतंत्र के समर्थन में हुआ आंदोलन

हांगकांग में लोकतंत्र के समर्थन में हुए विरोध-प्रदर्शनों ने आंदोलन का रूप ले लिया। यह विरोध प्रदर्शन कई महीनों तक चला। चीन द्वारा हांगकांग के नेता के लिए होनेवाले चुनाव में प्रत्याशियों के खुले चयन पर रोकना भारी पड़ता गया। पहले सभी प्रत्याशियों का नामांकन खुला होता था, लेकिन चीन ने चालाकी दिखाते हुए यह व्यवस्था खत्म कर दी और अब नेता पद के लिए नामांकन भी गोपनीय रहेंगे। चीन के इस कदम को हांगकांग की जनता, खास कर छात्र वर्ग ने आपत्ति जताई। इसके अलावा चीनी सरकार के कुछ पैâसलों से भी छात्रों को नाराजगी थी। हांगकांग में शुरू हुए आंदोलन ऑक्यूपाई सेंट्रल को लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं ने शुरू किया, जिसे बाद में यानी सितंबर माह में कक्षाओं का बहिष्कार कर एक अलग आंदोलन खड़ा कर दिया। आंदोलन करते इन छात्रों का नेतृत्व जोशुआ वोंग ने किया।

इजराइल और गाजा के बीच हुए संघर्ष में हजारों मृत-गाजा में संक्षिप्त शांति के बाद २०१४में इजरायल और हमास के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया। दोनों पक्षों ने संयम बरतने के अंतरराष्ट्रीय आह्वानों को नजरंदाज किया तथा यहूदी देश ने युद्ध के `दीर्घकालिक’ होने की चेतावनी दी। तीन सप्ताह से अधिक समय तक चले लड़ाई में हजारों फलस्तीनी और दर्जनों इजरायली मारे गए। इस युद्ध की शुरुआत जुलाई महीने में हुई और हमास ने अपने लड़ाकों की मौत को लेकर बदले की कार्रवाई शुरू की। करीब दो माह तक दोनों पक्षों के बीच हमले हुए और हजारों लोगों की जान गई।

जलवायु परिवर्तन पर हुआ समझौता

जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक सहयोग को मूर्त रूप देते हुए अमेरिका और चीन के बीच व्यापक समझौता हुआ। इस समझौते में कार्बन उत्सर्जन कम करने की भूमिका पर जोर दिया गया। जलवायु परिवर्तन पर अमेरिका और चीन के बीच समझौते का उल्लेख करते हुए कहा गया कि पेरिस समझौते की राह के अवरोधों को हटाने में इससे मदद मिलेगी।