तीन तलाक पर तीन साल की जेल


मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी

अगले सप्ताह हो सकता हैं पेश

नई दिल्ली (ईएमएस)। गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव के खत्म होने के बाद संसद का शीतकालीन सत्र शुक्रवार को शुरू हो गया है। सत्र की शुरुआत से ही मोदी सरकार कई अहम बिलों को पास कराने का लक्ष्य है। इसी देश में मुसलमान महिलाओं के हक के लिए तैयार किए गए तीन तलाक पर गैर-जमानती बिल को मोदी कैबिनेट ने शुक्रवार को मंजूरी दे दी है। इस बिल को अगले हफ्ते पेश किया जा सकता है। बिल में तीन तलाक देने पर तीन साल की सजा तक का प्रावधान है।

सरकार द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ नाम से इस विधेयक को लाएगी। ये कानून सिर्फ तीन तलाक पर ही लागू होगा। इस कानून के बाद कोई भी मुस्लिम पति अगर पत्नी को तीन तलाक देगा तो वो गैर-कानूनी होगा। बता दें कि इसी साल 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को गैर कानूनी करार दिया था।

मोदी सरकार इसके लिए काफी लंबे समय से तैयारी कर रही थी,1 दिसंबर को ड्राफ्ट तैयार कर रिव्यू के लिए भेजा गया था,और 10 दिसंबर तक देश के सभी राज्यों से इस मामले में सुझाव मांगा था। सरकार की मानें तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी देश में कई तीन तलाक के मामले सामने आए थे,बिल को झारखंड,असम,मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र,मणिपुर और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का समर्थन मिला है। बता दें कि बिल के तहत किसी भी स्वरूप में दिया गया तीन तलाक वह चाहें मौखिक हो, लिखित और या मैसेज में,वह अवैध होगा।

जो भी तीन तलाक देगा, उसको तीन साल की सजा और जुर्माना हो सकता है। यानि तीन तलाक देना गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध होगा। इसमें मजिस्ट्रेट तय करेगा कि कितना जुर्माना होगा।
आपको बता दें कि सरकार के इस कदम को लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 17 दिसंबर को दिल्ली में एक बैठक बुलाई हैं। इस बैठक में पर्सनल बोर्ड तय करेगा कि किस तरह तीन तलाक वाले बिल पर आगे बढ़ा जाए।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने कहा कि मोदी सरकार तीन तलाक पर जो बिल ला रही है।वह मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए नहीं, बल्कि एक तरह राजनीतिक स्टैंड है। इसके पूर्व पीएम नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए एक मंत्री समूह बनाया था,जिसमें राजनाथ सिंह, अरुण जेटली,सुषमा स्वराज,रविशंकर प्रसाद, पीपी चौधरी और जितेंद्र सिंह शामिल थे।