जम्मू-कश्मीर में भाजपा सरकार; उमर किंग मेकर !?


नई दिल्ली में भाजपा नेताओं के साथ उमर की मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में गर्माहट

भाजपा को ७ में से ६ अन्यों का समर्थन मिलने अटकलों की आस में नजरें अब नेशनल कांफ्रेंस पर

सीटों के लिहाज से पिछड़ने के बाद भाजपा की सरकार बनवा कर राज्य में अपनी राजनीतिक में पेंठ कायम रख सकते हैं उमर अब्दुल्ला

आलाकमान से झंडी मिलने के बाद सरकार बनाने की जुगत में भाजपा; राम माधव हुए सक्रिय, सज्जाद लोन से जुड़े तार

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित हो गये हैं। महबूबा मुफ्ती की पीडीपी 28 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। दूसरे नंबर पर भाजपा 25 सीटें प्राप्त कर पाईं। नेशनल कांफेंस 15 और कांग्रेस को 12 सीटें मिलीं। अन्यों के खाते में 7 सीटें रहीं। इस गणित के बाद किसी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में अब जबकि गठबंधन की सरकार बननी निश्चित है, नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कौन किसके साथ जाकर बैठता है। राजनीतिक समीकरण यही इंगित कर रहे हैं कि जोड़तोड में इस बार भाजपा बाजी मार सकती है।

एक तथ्य जो उभर कर सामने आ रहा है वह यह कि पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला किंग मेकर बनकर उभर सकते हैं। यद्यपि उमर अब्दुल्ला ने कल मजाकिया लहजे में कहा था कि बिहार में नितीश और लालू एक हो सकते हैं, तो घाटी में वे और महबूबा क्यों नहीं। लेकिन यदि वास्तविकता देखें तो ऐसा होना बहुत मुश्किल है। दोनों की राजनीति एक-दूसरे के विरोध पर ‌टिकी हुई हैं। ऐसे में सीटों के मामले में पिछड़ने और राज्य में अपना राजनीतिक अस्तित्व कायम रखने के लिये उनके लिये जरूरी है कि वे ऐसा राजनीतिक निर्णय लें जिससे आने वाले छ वषों के लिये वह हाशिये पर जाने से बच सकें। ऐसे में एक विकल्प उनके पास है भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनवाने का।

राजधानी दिल्ली में जो राजनीतिक घटनाक्रम आकार ले रहा है, उसमें संकेत भी इसी प्रकार के मिल रहे है। गुरुवार को नई दिल्ली में उमर अब्दुल्ला की मुलाकात भाजपा नेताओं के साथ हुई बताई गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार वे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और भाजपा नेता राम माधव से मिले। दूसरी रिपोर्ट के अनुसार वे वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिले। यूं तो उमर लंदन में अपने माता-पिता की सर्जरी के बाद उनसे मिलने जाने के लिये विमान पकड़ने दिल्ली पहुंचे थे। लेकिन यहां उक्त बैठक के बाद वे श्रीनगर लौट गये हैं। उन्होंने बाद में ट्वीट करके कहा कि वैसे भी वे २७ दिसम्बर को विदेश जाने वाले थे। हालांकि बाद में राम माधव ने ट्वीट करके इस बात का खंडन किया कि उनकी नेशनल कांफ्रेंस के किसी भी नेता से मुलाकात हुई है।

उधर जम्मू में भाजपा के चुने हुए विधायकों की बैठक हुई जिसमें विधायक दल का नेता चुनने का अधिकार पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को दे दिया गया है। प्रतीत हो रहा है कि भाजपा और नेशनल कांफ्रेंस में गठबंधन की संभावनाएं प्रबल हैं। यदि ऐसा होता है तो उमर अब्दुल्ला किंग मेकर बन कर उभर सकते हैं और अपना राजनीतिक वजूद भी कायम रख सकते हैं।

सरकार बनाने की सभावनाएं –

कांग्रेस के समर्थन से पीडीपी की सरकार

नतीजों के बाद महबूबा मुफ्ती ने पत्रकारों से कहा था कि उन्हें सरकार बनाने की कोई जल्दी नहीं है और वे जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेंगी। उन्होंने भाजपा के प्रति भी नरमी बनाये रखी, यह कहते हुए कि घाटी में लोगों ने नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के विरोध में मतदान किया है। लेकिन पीडीपी, भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाये ऐसा वास्तविक धरातल पर होता नजर नहीं आ रहा। दूसरी ओर पीडीपी को कांग्रेस का समर्थन तो आसानी से मिल सकता है और उसके बाद चार अन्यों की जरूरत पड़ेगी। पीडीपी के लिये इन चारा विधायकों का समर्थन जुटाना कठिन दिख रहा है क्योंकि ७ विधायक जो चुन कर आये हैं उनमें से २ सज्जाद लोन के पक्ष के और एक भाजपा के बागी हैं। इनके अलावा तीन और भाजपा की ओर रूझान बनाये हुए हैं। ऐसे में पीडीपी के लिये राह मुश्किल प्रतीत हो रही है।

उधर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के कल के बयान कि वे किसी को समर्थन दे भी सकते हैं, और किसी का समर्थन ले भी सकते हैं। भाजपा इस बार यह चाहती भी है कि इस बार जोर लगा ही लिया जाए और जम्मू कश्मीर में सरकार बना ही ली जाए। इस परिदृश्य में देखना होगा कि क्या उमर अब्दुला किंग मेकर के रूप में उभरते हैं?