अब बनेगा राममंदिर?


प्रयागराज में अभी कुम्भ के दरम्यान सन्त समागम तथा विविध धार्मिक कार्यक्रम पुरजोर में चालू है।
Photo/Loktej

प्रयागराज में अभी कुम्भ के दरम्यान सन्त समागम तथा विविध धार्मिक कार्यक्रम पुरजोर में चालू है। कल वहां पर चिर प्रतीक्षित धर्म संसद का समापन हुआ जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुसंघिक संघठन विश्व हिंदू परिषद द्वारा आहूत की गई थी। इस धर्म संसद से कुछ दिन पहले ही परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने घोषणा कर दी थी कि राममंदिर के मामले में जो सन्त समुदाय आदेश देगा उसी के अनुसार कार्य आगे किया जाएगा। कल धर्म संसद के दूसरे तथा आखिरी दिन आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर समय निर्णायक मोड़ में है। उन्होंने कहा- मैं समझता हूं कि 4-6 महीने (चुनावी वक्त) की उथल-पुथल के दौरान कुछ हुआ तो ठीक वरना उसके बाद तो कुछ जरूर होगा। यह हम सब देखेंगे।

इस बात पर वहां मौजूद कुछ संत नाराज हो गए और नारेबाजी करने लगे। संतों ने कहा कि अब विहिप और आरएसएस को समय नहीं देंगे। अब मंदिर निर्माण की तारीख चाहिए, रामलला अब ओर इंतजार नही करेंगे। उनको शांत करने का प्रयास करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि अगर जरुरत पड़ी तो हमें कहना पड़ेगा कि अब धैर्य नहीं चलेगा। छह अप्रैल को एक करोड़ लोग विजय मंत्र का जाप करेंगे। उन्होंने कहा कि आगे अगर मंदिर निर्माण से जुड़ा हुआ कोई कार्यक्रम करेंगे तो उसका प्रभाव चुनाव पर पड़ेगा। मंदिर बनाना है तो मंदिर बनाने वालों को चुनना होगा। यह भी देखना होगा कि मंदिर कौन बनाएंगे?यह मंदिर हिंदू राष्ट्र का वैभवशाली मंदिर होगा।

इससे पहले धर्म संसद में धर्मादेश पारित कर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने बसन्त पंचमी से अयोध्या कूचकर 21 फरवरी को राम मंदिर के लिए शिलान्यास की घोषणा की है। उसके अलावा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने भी शंकराचार्य के परम धर्मादेश का स्वागत व समर्थन करते हुए चार फरवरी के बाद अयोध्या कूच करने का निर्णय लिया है। धर्मसंसद में महामंडलेश्वर अखिलेशानन्द महाराज ने संतों से मोदी सरकार पर भरोसा रखने के लिए कहते हुए कहा कि मंदिर निर्माण में बाधाओं को दूर करने के लिए अब जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। स्वामी चिन्मयानंद महाराज ने भी मोदी सरकार पर भरोषा जताते हुए कहा कि कई वर्षों की तपस्या के बाद केंद्र में मोदी और प्रदेश में योगी सरकार है। पूरी उम्मीद है पीएम मोदी मंदिर निर्माण में कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

धर्म संसद में हालांकि संत समुदाय में से प्रमुख सन्तो तथा संघ प्रमुख के बयान से सरकार के प्रति आशा झलकती है परन्तु प्रधानमंत्री मोदी अपना नज़रिया एक इंटरव्यू में पहले ही बता चुके है तथा उन्हें कोर्ट के फैसले का इंतजार है। हालांकि केंद्र सरकार ने गैर विवादित भूमि मूल मालिको को लौटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया है परन्तु विवाद के तीनों पक्षकारों को मूल स्थान पर ही कब्जा करने की आकांक्षा है तथा हिन्दू समुदाय भी यही चाहता है कि जहां रामलला विराजमान है वही पर मंदिर का निर्माण होना चाहिए। शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती ने वही पर आग्नेय कौण में शिलान्यास की मंशा जताई है। आने वाले दिनों में इस पर राजनैतिक तथा धार्मिक घर्षण होगा यह साफ दिख रहा है परन्तु इसका लाभ किसे होगा यह वक्त ही बताएगा।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय