नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध क्यो?


भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ करने वाले नागरिकता कानून में संशोधन से संबंधित विधेयक संसद ने पास कर दिया था।
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अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ित हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी अल्पसंख्यकों के लिए भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ करने वाले नागरिकता कानून में संशोधन से संबंधित विधेयक पिछले मंगलवार को संसद ने पास कर दिया था।
लोकसभा में इस बिल पेश करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि असम की सीमा देश की सीमा है और जो भी जरूरी होगा, केंद्र सरकार वह सब करेगी।

सदन में गृहमंत्री सिंह ने बताया कि असम के छह समुदायों को आदिवासी समुदाय का दर्जा देने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में एक समिति का गठन किया था और समिति ने सिफारिश दे दी है । इस बारे में विचार विमर्श भी किया गया है।
इस संशोधन विधेयक का सबसे अधिक असर असम पर ही पड़ने वाला है। वहां के स्थानीय लोग इसका पुरजोर विरोध कर रहे है। इस विधेयक को लेकर असम में सियासी संग्राम मचा हुआ है। जहाँ एक ओर इसके विरोध में असमी जनता सड़क पर उतरी हुई है वही सोनोवाल सरकार पर भी संकट के बादल मंडराने लग गए है। भाजपा नीत सरकार से असम गण परिषद (एजीपी) ने अपना समर्थन पहले ही वापस ले लिया था, अब बोडो पीपल्स फ्रंट भी समर्थन वापसी का मन बना रही हैं।

इस बिल के विरोध पर असम अस्मिता के नाम पर सभी दल इकट्ठा हो रहे है, यहां तक कि सरकार में भी दो फाड़ करने की कोशिस की जा रही है। भाजपा के लिए बड़ा संकट यह है कि उसके 61 विधायको में से 40 विधायक ऐसे है जिनकी पृष्ठभूमि भाजपा की नही है। इनसे भाजपा सरकार को खतरा है क्योकि प्रतिपक्ष नेता ने यह तक कह दिया कि अगर 45 विधायक साथ मे आते है तो हम उनका समर्थन कर देंगे।

राजनैतिक अस्थिरता के विषय से हटकर अगर हम बात करे तो विरोध मेरे व्यक्तिगत मतानुसार उचित नही है, क्योकि जब हमारे देश का बंटवारा हुआ था तब इसे हिंदुस्तान के नाम से घोषित किया गया था ओर अगर अब कोई प्रताड़ित हिन्दू इस देश मे शरण लेना चाहे तो उसका विशाल हृदय से स्वागत करना चाहिए। बंटवारा अगर धर्म के नाम पर हुआ है तो भले ही संवेधानिक दृष्टिकोण से हम धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में है पर नैतिकता के आधार पर हिंदुओ को अधिकार प्रथम ही होना चाहिए , इस पर पक्ष तथा विपक्ष को राजनीति नही करनी चाहिए।

वैसे भी भारत माता सर्व आश्रयदात्री है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की अनन्त जयजयकार