यह कैसा देश प्रेम?


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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने स्थानीय आतंकियों को “माटी का सपूत” बताते हुए कहा कि उन्हें बचाने के लिए कोशिश की जानी चाहिए। महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में गन कल्चर को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार को स्थानीय आतंकी संगठनों से बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि गन कल्चर को वही खत्म कर सकता है जिनके हाथ मे बंदूक हो।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यहां तक कह दिया कि ऐसा महसूस हो रहा है कि 2019 के चुनाव की तैयारी में कश्मीर के लोगों को मोहरा बनाया जा रहा है, उनको इस्तेमाल किया जा रहा है। वोट की राजनीति हो रही है। इसी तरह से कांग्रेस ने 2014 चुनाव से पहले अफजल गुरु को फांसी दी गई वो यह सोचकर की शायद उन्हें इस तरह से कामयाबी मिलेगी। आज भाजपा भी वही दोहरा रही है।

आतंकियों को माटी का सपूत ओर राष्ट्र की संपत्ति बताकर पता नही पूर्व मुख्यमंत्री क्या सिद्ध करना चाहती है? जो आतंकी हमारे देश के स्वर्ग कहे जाने वाले प्रदेश कश्मीर की घाटी को रक्तरंजित करते रहे है, जिनको इस देश की मिट्टी, देश के नागरिकों से बिल्कुल भी लगाव नही है, जिनके कारण हमारे हजारों देश के सपूत सैनिक वीरगति को प्राप्त हो चुके है, जिनके कारण घाटी का माहौल दहशत से भरा हुआ है , उनको सपूत बतलाना वैसा ही है जैसे कातिल को रहनुमा बतलाना।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी पूर्व में भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी रह चुकी है तथा दोनो की सम्मिलित सरकार भी कश्मीर में थी लेकिन कुछ मुद्दों पर दोनो में सामंजस्य न बैठने पर भाजपा ने समर्थन वापिस ले लिया था। चूंकि जम्मू कश्मीर विधानसभा राज्यपाल की अनुशंसा से भंग हो चुकी है तो लोकसभा तथा विधानसभा के चुनाव लगभग साथ मे ही होने वाले है। उस समय ऐसे बयान विचलित करने वाले है, वैसे वो स्वयं स्वीकार करती है कि उनके राजनीति में प्रवेश के समय 1996 से ही वो यह बात कह रही है तो भाजपा जैसी अपने आप को राष्ट्रवादी पार्टी कहने वाली पार्टी पर भी प्रश्न खड़ा होना लाजमी है।

वैसे इस प्रकार के बयान हमारी सेना को हतोत्साहित करने वाले हो सकते है जो रात दिन मृत्यु के साये में रहकर उनसे मुकाबला करते है। इस बयान पर हम यही कह सकते है कि यह कैसा देश प्रेम है।