संघ की हिदायत सरकार को


जैसे जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे है वैसे वैसे सबकी दृष्टि सरकार तथा विपक्ष के हर बयान ओर क्रियाकलापों पर लगातार बनी हुई है।
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जैसे जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे है वैसे वैसे सबकी दृष्टि सरकार तथा विपक्ष के हर बयान ओर क्रियाकलापों पर लगातार बनी हुई है। इसके अलावा जिसके प्रति निगाह लोगो की लगातार बनी हुई है वो संघ है। भाजपा के लोग आरएसएस से बहुत अधिक आशान्वित है तथा होना भी लाज़मी है क्योकि भाजपा संघ का ही अनुसांगिक संघठन है। पिछले चुनाव में आरएसएस की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही थी जब उन्होंने पहली बार पार्टी के नाम पर वोट मांगे थे।

लेकिन अभी राममंदिर के मुद्दे पर संघ के शीर्ष नेतृत्व में थोड़ा रोष व्याप्त है। हालांकि इसके परिणामस्वरूप भारत भर में धर्मसभाये हुई जिसके कारण जनता में थोड़ा रोष कम हुआ था परन्तु प्रधानमंत्री मोदी के साक्षात्कार में कोर्ट के फैसले की राह देखने की बात कहने पर फिर से थोड़ी नाराजगी हुई है।

संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने कुंभ मेले में आयोजित एक कार्यक्रम में मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि राम मंदिर 2025 में बनेगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या में साल 2025 में जब राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा तो देश तेजी से विकास करने लगेगा। जोशी ने कहा कि देश में विकास की गति उसी तरह बढ़ेगी, जैसे 1952 में सोमनाथ में मंदिर निर्माण के बाद शुरू हुई थी। अयोध्या के मंदिर निर्माण के बाद देश अगले 150 साल के लिए पूंजी प्राप्त कर लेगा।

हालांकि बाद में सफाई देते हुए भैयाजी ने कहा कि हमारी इच्छा है कि मंदिर निर्माण 2025 तक पूरा होना चाहिए। अब तय सरकार को करना है। 2025 से मंदिर निर्माण शुरू करने की बात नहीं है। अगर अभी से मंदिर बनना शुरू होता है तभी 5 साल में बनेगा।
इसके अलावा संघ प्रमुख मोहनराव भागवत ने भी नागपुर में एक कार्यक्रम में कहा कि देश में कोई युद्ध नहीं चल रहा फिर भी सीमाओं पर सैनिक शहीद हो रहे हैं। इसका कारण यह है कि हम अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहे।

उन्होंने कहा कि अपने देश के लिए मरने का समय तब था, जब स्वतंत्रता नहीं थी। अब आजादी के बाद सीमाओं पर अपने देश के लिए मरने का समय तब होता है जब युद्ध होता है। देश को बड़ा बनाना है तो देश के लिए जीना सीखना होगा।

मोहन भागवत ने यह भी कहा कि हर किसी को प्रयास करना होगा। यह ऐसा कुछ नहीं है जिसके लिए हम किसी को कॉन्ट्रैक्ट दे सकते हैं। हम बस यही सोचते हैं कि सरकार यह करेगी, पुलिस यह करेगी, सेना यह करेगी, लेकिन यह ऐसा नहीं है। पूरे समाज को कोशिशें करनी होंगी। किसी देश से लड़ाई हुई तो पूरे समाज को लड़ना पड़ता है। अगर किसी सैनिक का बलिदान हो गया तो उसके परिवार को कमी न हो, यह चिंता समाज को करनी पड़ेगी।

आरएसएस के दोनों शीर्ष नेताओं का बयान यद्यपि सरकार को सामान्य हिदायत है परन्तु दोनो ही मुद्दे आगामी चुनाव के लिए ज्वलंत मुद्दे है। हो सकता है कि संघ इस ओर ध्यान आकर्षित करके सरकार को शीघ्र कोई निर्णय करने के लिए प्रेरित कर रहा हो। पिछली बार की तरह ही अगर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना हो तो इस ओर ध्यान देना पड़ेगा ताकि परम्परागत वोटर तथा प्रमुख सपोर्टर खुश रहे।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय ।