शाहबानो से अबतक : तीन तलाक


तीन तलाक से जुड़ा नया विधेयक कल गुरुवार को करीब 5 घंटे चली चर्चा के बाद लोकसभा में पारित हो गया।
Photo/Loktej
तीन तलाक से जुड़ा नया विधेयक कल गुरुवार को करीब 5 घंटे चली चर्चा के बाद लोकसभा में पारित हो गया। अब यह विधेयक राज्यसभा में भेजा जाएगा। सरकार 8 जनवरी तक चलने वाले शीतसत्र में ही इसे पारित कराना चाहती है। कल लोकसभा में विधेयक पर वोटिंग के दौरान कांग्रेस, अन्नाद्रमुक, द्रमुक और सपा के सदस्यों ने वॉकआउट किया था।
इस अवसर पर मुझे बहुचर्चित शाहबानो प्रकरण याद आता है।
 मामला 1978 का था। इंदौर निवासी शाहबानो को उसके पति मोहम्मद खान ने तलाक दे दिया था। पांच बच्चों की मां 62 वर्षीय शाहबानो ने गुजारा भत्ता पाने के लिए कानून की शरण ली। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा और उस पर सुनवाई हुई। उच्चतम न्यायालय तक पहुँचते मामले को सात साल बीत चुके थे।  न्यायालय ने सीआरपीसी की धारा 125 के अंतर्गत निर्णय दिया जो हर किसी पर लागू होता है चाहे वो किसी भी धर्म, जाति या संप्रदाय का हो। कोर्ट ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाते हुए शाहबानो के हक में फैसला देते हुए मोहम्मद खान को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पुरजोर विरोध किया। शाहबानो के कानूनी तलाक भत्ते पर देशभर में राजनीतिक बवाल मच गया।  राजीव गांधी सरकार ने मुस्लिम महिला को मिलने वाले मुआवजे को निरस्त करते हुए एक साल के भीतर मुस्लिम महिला (तलाक में संरक्षण का अधिकार) अधिनियम, (1986) पारित कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया।
सुना था कि इस देश का कानून सबके लिए समान है फिर इस तरह क्यो हुआ यह समझ नही आया। समान नागरिक संहिता का उल्लेख संविधान के भाग 4 में अनुच्छेद 44 में किया गया है।
लेकिन मुस्लिम सम्प्रदाय का व्यक्तिगत कानून अलग है जिसे हम मुस्लिम पर्सनल लॉ के नाम से जानते है।
हम दोष किसे दे? अगर हम बात राजनैतिक पार्टीयो की करे तो लगभग सारे अपने वोट बैंक के लिए काम कर रहे लगते है। बिहार में एनडीए सरकार ने मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं को दिए जाने वाले भत्ते में पिछले साल इन्ही दिनों 15000 रुपये की वृद्धि की थी जो उन्होंने ही 2005 में प्रारम्भ किया था।
तलाकशुदा महिलाओं की दयनीय स्थिति का विचार किये बिना विपक्षी सांसद बोल देते है कि यह सिर्फ मुस्लिम पुरुषों को उत्पीड़ित करने के लिए नया विधेयक लाया गया है ।
कमोबेश इस देश मे असमानता के लिए सभी दल जिम्मेदार है। जो निर्णय देश हित मे लिए जाने चाहिए वो आजकल वोट बैंक को देखकर क्यो लिए जाते है?