इस रात की सुबह कब होगी?


जब से जीएसटी कपड़े पर लगी है तबसे कई बार ऐसा मौका आया है जब व्यापारी को चोर शब्द से सम्बोधित किया गया है।
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जब से जीएसटी कपड़े पर लगी है तबसे कई बार ऐसा मौका आया है जब व्यापारी को चोर शब्द से सम्बोधित किया गया है। हालांकि कोई जिम्मेदार व्यक्ति ने अगर कहा है तो बाद में खेद भी प्रगट किया है, लेकिन सोशल मीडिया पर गाहेबगाहे यह देखने सुनने को मिल ही जाता है और रोष प्रकट करने के बाद विचित्र तर्क भी मिल जाते है। यह सही है कि थोड़े टेक्स की बचत के लिए व्यापारी कभी कभी ट्रांजेक्शन न दिखाकर अन्य तरीके अपना लेते है।लेकिन जो वाकई जनता के पैसे पर गन्दी नज़र करके उसे अपनी जेब मे डालना चाहते है, ऐसे नेताओं तथा नोकरशाहो को कोई जिम्मेदार व्यक्ति ने सार्वजनिक रूप से चोर नही कहा है। यह बात अलग है कि अपने विपक्षी पार्टी के नेता पर आरोप भले ही लगा दे पर पूरी जमात को चोर किसी ने नही बताया, जैसे बड़े आराम से कह देते है कि व्यापारी चोर है, ओर सारे व्यापारियों पर अंगुली उठ जाती है। जबकि यह कई बार देखा गया है जब नेताओ ओर नोकरशाहो द्वारा आम आदमी की जेब तराशी गई हो।
अभी परसो ही हमारे शहर के महानगरपालिका के भाजपा के पार्षद जयंती भंडेरी को एसीबी ने 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

एसीबी ने उन्हें कल कोर्ट में पेश किया जहाँ कोर्ट ने रिश्वतखोर पार्षद को एक दिन की रिमांड का आदेश दे दिया। वैसे एसीबी ने उनकी तीन दिन की रिमांड मांगी थी ताकि वो पता कर सके कि उनके इस काले कारनामे में ओर भी कोई नेता या अधिकारी शामिल है या नही।
जयंती भन्डेरी ने कतारगाम क्षेत्र में एक निर्माणाधीन बिल्डिंग के बांधकाम को तुड़वाने की धमकी एक डॉक्टर को दी थी, उस डॉक्टर ने एसीबी से सम्पर्क किया तो एसीबी ने इसका पूरा खेल रच डाला। जो अपने आप को बाजीगर समझ रहा था वो नेता ही उनके जाल में रंगे हाथों फंस गया। वैसे एक कहावत है कि पकड़ा जाए तब चोर, नही तो हमेशा साहूकार।

पार्षद जयंती जब पैसे के साथ पकड़ा गया तो उसे भी जनता ने चोर घोषित कर दिया। पर क्या इससे पहले वो साहूकार था? जब तक न पकड़ा गया उससे पहले भी तो हो सकता है उसने यह घृणित अलोकतांत्रिक असंवैधानिक कृत्य चालू रखा हो? वैसे यह महानगरपालिका के इस कार्यकाल की चौथी घटना है जब कोई पार्षद रंगे हाथ पकड़ा गया हो। तब तो आप समझ सकते है कि भृष्टाचार किस हद तक फैला हुआ है। ओर भी न जाने कितने अधिकारी व नेता इस प्रकार का कुकृत्य करते होंगे, लेकिन जब तक पकड़े न जाये तब तक तो साहूकार वाला तमगा लगा कर ही घूमेंगे न?

कभी सोचा है कि ऐसा क्यो होता है? कारण सीधा ओर सटीक है, कि नेता पद पाने के लिए जी तोड़ मेहनत करता है,पैसे को पानी की तरह फूंकता है, तब कही जाकर उसे जनसेवा का मौका मिलता है। और जब मौका मिल ही जाता है तो भला सेवा के अवसर को ऐसे ही क्यो जाने दे? फिर बराबर अपने किये हुए खर्च की वसूली करने लगता है, बेचारा करे भी क्यो नही? इन्वेस्टमेंट जो किया था।
इन सब घटनाओं की रोकथाम तभी हो सकती है जब हम हमारे सिस्टम को परिवर्तित करेंगे। सबसे पहले तो हमे चुनाव खर्चो में कटौती करवानी होगी, जिससे कि नेता लोग चुनाव में बेहिसाब खर्च करके उसकी वसूली जनता से न करे। दूसरा शैक्षणिक योग्यता भी निर्धारित करनी होगी।

तभी हमारे भारत से यह दूषण जाएगा। अगर शासक ही दूषित विचारों के साथ हो तो जनता के विचार भी वैसे ही होंगे। तथा जो खुद कभीकभार हाथ मार लिया करते है वो दुसरो को भी चोर ही समझेंगे।  देखते है चुनाव पद्यति में कब परिवर्तन होगा, पर तब तक कोई नेता या अधिकारी रिश्वत मांगे, धमकी दे तो एसीबी को जानकारी अवश्य दे।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय