VPS News Bulletin : व्यापारियों की हर प्रकार से मदद व्यापार प्रगति संघ का मुख्य उद्देश्य


अलग-अलग मंडियों के वाट्सग्रुप के माध्यम से उजागर किया जाता है चीटर व्यापारियों का कच्चा चिट्ठा।
Photo/Loktej
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अलग-अलग मंडियों के वाट्सग्रुप के माध्यम से उजागर किया जाता है चीटर व्यापारियों का कच्चा चिट्ठा

व्यापार प्रगति संघ क्यों ?

एक समय था जब सूरत का व्यापार अधिकतर आढ़त के माध्यम से होता था। आढ़तिये बाहर के व्यारियों पर अंकुश रखकर उनसे एक सीमा में व्यापार करते थे, जिससे बाहर के व्यापारी पर अंकुश रहता था। उसे एक लिमिट में उधारी दी जाती थी।

व्यापार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी

आज सूरत का अधिकतर व्यापार डायरेक्ट या एजेंट के माध्यम से होता है। ऐसे में बाहर के व्यापारियों पर अंकुश ख़त्म हो गया। उसे ज़रूरत से ज़्यादा माल मिलने लगा। ऐसे में अनेक चालबाज़ / धोखेबाज़ व्यापारी / एजेंट उत्पन्न हो गये या नियत खऱाब करने लगे।

सूरत के व्यापारियों की रक़म फ़सने लगी

सीमा से अधिक माल एजेंटों के मारफत मिलना शुरू होते ही बाहर का व्यापारी एक का भुगतान रोककर दूसरे के साथ व्यापार करने लगा। इस कारण सूरत के व्यापारियों के साथ अनियमितताएं बढऩे लगीं। आज हालात ये हैं कि कपड़ा मार्केट में पिछले एक दशक से पार्टियों के उठने की अनेकों घटनाओं से व्यापार करना दूभर हो गया है। एक कपड़ा व्यवसायी दिन-रात मेहनत कर अपने व्यापार को गति देने में वर्षों लगाता है। उधर दिसावर की कपड़ा मंडियों में कुछ तथाकथित व्यापारियों ने व्यापारी शब्द को कलंकित करना शुरू कर दिया। एक-दो बार लेन-देन कर व्यवहार बनाने के बाद लाखों रुपये का माल लेकर अमुक व्यापारी विश्वास का गला घोंटने में भी कोई कोतहाई नहीं बरतते। कुछ एजेंट व व्यापारी तो चीटिंग करने के उद्देश्य से दुकान खोलने लगे। कई ग्रुप बनाकर एक-दूसरे का रेफ्ऱेन्स देकर करोड़ों की रक़म व्यापारियों की लेकर रफूचक्कर होने लगे।

व्यापारियों की सबसे बड़ी समस्या भुगतान की बन गई। कभी कोई 30 दिन की बात कर 120 दिन कर रहा है, कभी कोई एक का भुगतान रोक कर कभी दूसरे से तो कभी तीसरे से व्यापार कर रहा है, कभी कोई नियत खराब कर रकम नहीं दे रहा है। व्यापारियों की स्थिति यह है की कहीं हम से माल लेना बन्द ना कर दे या हमारी रकम रोक ना ले इस डर से हम कड़क तकादा भी नहीं करते जबकि वो व्यापारी हमारे भुगतान को रोककर मज़े करता है। हम देखने के सिवा कुछ नहीं कर सकते । इन्हीं तमाम समस्याओं के मद्देनजर देश भर में कपड़ा कारोबार के सबसे बड़े केंद्र सूरत में ऐसे व्यापारिक संगठन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी जो इन वास्तविक मुद्दों पर फोकस करके व्यापारियों की मदद कर सके। और इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिये व्यापार प्रगति की नींव पड़ी।

संजय जगनानी ने उठाया बीड़ा

फोस्टा के पूर्व प्रमुख एवं चार्टड एकाउंटेन्ट संजय जगनानी ने 16 जनवरी 2016 को व्यापार प्रगति संघ (वीपीएस) की स्थापना कर व्यापारियों एवं व्यापार हित में काम करने की बीड़ा उठाया। परिणाम स्वरुप व्यापारियों का अच्छा समूह जुड़ता गया और उन्हें लाभ भी मिलता है।

रविवार 10 मार्च, 2019 को शिवाजी गार्डन, घौड़दौड़ रोड़ के पास हुई साप्ताहिक बैठक में उन्होंने कहा कि व्यापारियों के डूबे हुए रुपये निकालने एवं उन्हें मदद के लिए ही यह संघ बनाया है। संघ अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़े इसके प्रयास किये जा रहे हैं।

तीन वर्ष के अल्प समय में सैकड़ों व्यापारी लाभान्वित हुए हैं और हो भी रहे हैं। आलम यह है कि व्यापार प्रगति संघ का नाम आते ही व्यापारियों को नुकसान पहुंचाने की मंशा रखने वाले व्यापारी सरलता से पार्टी का बकाया चुका देते हैं।

 

वॉट्सग्रुप के जरिये सूचना का आदान-प्रदान

आज वीपीएस द्वारा सभी राज्यों को मिलाकार 125 वॉट्सएप ग्रुप चलाये जा रहे हैं जिसमें करीब 25 हजार से 30 हजार सदस्य जुड़े हैं। इन ग्रुपों के माध्यम से उन मंडियों के व्यापारियों का कच्चा एवं पक्का चि_ा उजागर करते हैं, जिनका कारोबार साफ-सुथरा नहीं होता। ऐसे में बदनामी होने के डर से वर्षों से डूबे रुपये व्यापारियों के निकल रहे हैं। यही नहीं बल्कि जिन व्यापारियों का लेन-देन ठीक नहीं है उनकों चिन्हित कर ग्रुप में डाल देते हैं, ताकि व्यापारी गण ऐसे व्यापारियों से सतर्क हो जाए।

हर रविवार बैठक

व्यापारियों का अधिक से अधिक सहयोग हो सके, इसके लिए संघ ने प्रत्येक रविवार को सुबह 8 से 9 बजे तक राम चौक के पास शिवाजी गार्डन में व्यापारियों की समस्या एवं सुझाव हेतु एक मीटिंग आहूत करते हैं। कोई भी व्यापारी बिना किसी जात-पात के अपनी भुगतान संबंधी समस्याओं को लेकर निर्धारित समय पर बैठक-स्थल पर पहुंच सकता है। अपनी समस्याएं प्रस्तुत करने के बाद संबंधित प्रमाणों को देखकर यदि संस्था के नियुक्त पंचों व कन्वीनरों को संतुष्टि हो जाती है तो उसके निवारण के प्रयास शुरू कर दिये जाते हैं।

विभिन्न विकल्प सुझाये जाते हैं। आवश्यकता पडऩे पर सामने वाली व्यक्ति से वीपीएस की ओर से बात की जाती है और गांधीगिरी के माध्यम से बकाया की वसूली के उपाय किये जाते हैं। वीपीएस के 136 कन्वीनर स्वत: प्रेरणा से बने हैं। कोई भी व्यापारी उनसे समय लेकर प्रतिष्ठान पर जा कर नि:शुल्क मदद ले सकते हैं। वीपीएस द्वारा वकील की सहायता भी उपलब्ध है, जो समय-समय पर नि:शुल्क सलाह-मश्वरा देते हैं और आवश्यकता पडऩे पर न्यूनतम दर पर चैक रिटर्न व अन्य व्यापारिक समस्याओं के केस लड़ते हैं। वीपीएस पुलिस कार्रवाई में व्यापारियों की भरपूर मदद और मार्गदर्शन करती है और जरूरत पडऩे पर साथ में खड़ी भी रहती है।

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