सबसे बड़ा धर्म परोपकार और सर्वोपरि कर्म सेवा है – पूज्या किशोरीजी


पूज्य राधास्वरुपा जया किशोरीजी ने कहा कि नानी बाई रो मायरो कथा भगवान एवं भक्त के अटूट श्रद्घा की प्रेरणाकथा है।
Photo/Loktej
सत्संग की बात, जया किशोरी जी के साथ

(वीरेन्द्र प्रताप दूबे)

श्याम प्रचार मंडल महिला इकाई सूरत द्वारा आयोजित तथा नारायण सेवा संस्थान द्वारा प्रेरित त्रिदिवसीय ‘ नानी बाई का मायरा ‘ कार्यक्रम में भक्तों को श्यामरंग में रंगने पधारी कथाकार पूज्या जयाकिशोरीजी से लोकतेज के इस प्रतिनिधी ने मुलाकात की और सत्संग तथा वर्तमान के सामाजिक पहलूओं के बारे में चर्चा की।

Photo/Loktej

वार्तालाप दौरान पूज्या किशोरी ने संक्षिप्त परिचय में कहा कि उनका जन्म कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में हुआ, जहां से उन्होने शिक्षा-दीक्षा प्राप्त की हैं। उनके माता-पिता मूलत: सुजानगढ़ तहसील अंतर्गत चुरू जिला राजस्थान के निवासी हैं। गौड़ ब्राह्मण कुल में पैदा हुई किशोरी का नाम जया शर्मा है। 7 वर्ष की उम्र में आपने भजन गाना प्रारंभ कर दिया था। सत्संग की ओर रूचि बढऩे से उन्होने प्रेमसुखदास, पं. विनोदजी साहेल से दीक्षा ली। उनके गुरू ने उनके नाम के आगे ‘किशोरीजी’ की उपमा प्रदान की तभी से उनका नाम जया किशोरीजी पड़ गया। बी.काम तक पढा़ई की हुयी किशोरीजी ने अब तक 254 नानी बाई का मायरा प्रोग्राम कर चुकी हैं। सूरत में उनका 255वां कार्यक्रम जारी है। अब तक कुल 36 जगहो पर भागवत कथा कह चुकी हैं।

उल्लेखनीय तो यह है कि किशोरीजी नानी बाई का मायरा, भागवत कथा के अलावा ‘मोटीवेशन स्पीच’ का प्रोग्राम देते है, इसलिए देती हैं कि बच्चो को उचित ज्ञान मिले और हताशा, भय से बच्चे दूर रहें। उन्होने कहा कि कथा में अधिकतर अभिभावक कथा सुनने कम और बच्चो की, उनकी समस्याएं ज्यादा लेकर आते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि सबसे बड़ा धर्म क्या है तो उन्होने कहा परोपकार, इससे बढक़र कोई दूसरा धर्म नही है दूसरों की भलाई करना लोग सीख जाएं तो धरती से दुर्भावनाएं, अपराध जैसे कृत्य खत्म हो सकते हैं। सबसे बड़ा कर्म उन्होने सेवा बताया चाहे वह सेवा स्वयं के लिए हो या औरों के लिए।

संत और असंत की पहचान क्या है? उन्होने कहा कि देखिए संत वह है जो दूसरो के दुख में दुखी और सुख में सुखी होता है। असंत वह इंसान है जो खुद को  भगवान कहता है। वर्तमान में देश के नेताओं में भगवान, देवी, देवताओं को दलित कहने की होड़ सी मची हुयी थी, इसके बारे में आपकी प्रतिक्रिया? पूज्या किशोरीजी ने कहा भगवान की कोई जाति-पाति नही होती वह तो सबके स्वामी हैं। 36 कथाओं में उन्होने इंदौर और हैदराबाद की कथा में 1 लाख से अधिक भक्तों द्वारा कथा सुनना को यादगार बताया।

सबसे प्रिय धार्मिक स्थल खाटू श्याम धाम बताया। सूरत में भक्ति की धारा 12 महीने बहती रहती है और यहां के नागरिक संतप्रिय हैं जिनका प्रेम उन्हे सूरत खींच लाता है।

किशोरीजी के माता-पिता अक्सर उनके कार्यक्रम में साथ-साथ रहते हैं। उनके माता-पिता धन्य है जिनकी गोद में जयाकिशोरीजी जैसे स्रस्वती स्वरूपा बिटिया पैदा होकर जग में कृष्णप्रेम की गंगा प्रवाहित कर रही हैं।

 

अगले पेज पर पढें सूरत में ‘नानी बाई का मायरा’ आयोजन की रपट