कठिन डगर है अबकी दिल्ली की


हिन्दू धर्म के आस्था का प्रतीक कुम्भ महापर्व जहां दुनिया भर से हिन्दू आस्था के इस महापर्व पर डुबकी लगाने पहुंच रहे है।
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हिन्दू धर्म के आस्था का प्रतीक कुम्भ महापर्व अभी प्रयागराज में त्रिवेणी तट पर चल रहा है जहां दुनिया भर से हिन्दू आस्था के इस महापर्व पर डुबकी लगाने पहुंच रहे है। करोड़ो की संख्या में श्रद्धालु इस अवसर पर प्रयागराज पहुंच रहे है। साधु सन्यासियों के अलावा बड़ी संख्या में धार्मिक नेता भी इस मेले में पहुंच रहे है तो पत्रकारों का जमावड़ा भी वहां लगा हुआ है जो उन नेताओं का मन्तव्य लेते रहते है। यह वर्ष चुनावी वर्ष होने के कारण खबरनवीसों को हर पहलू पर नज़र रखनी पड़ रही है तो धार्मिक पहलू पर नज़र रखने के लिए तथा धार्मिक नेताओं का मन्तव्य लेने के लिए कुम्भ से बेहतर जगह भी कोई नही है।

कल विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार पत्रकारों से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने सारे दरवाजे हमारे लिए बन्द कर रखे है, पर वो अपने दरवाजे हमारे लिए खोलती है तथा राममंदिर निर्माण को अपने मेनिफेस्टो में शामिल करती है तो विहिप उनको भी समर्थन देने के बारे में सोच सकती है। विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष ने मंदिर निर्माण के अन्य विकल्पों के बारे में पूछे जाने पर यह बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदुत्व तथा राष्ट्रीयता के लिए भाजपा से अधिक प्रतिबद्ध पार्टी कांग्रेस या अन्य कोई नही है।
आलोक कुमार ने यह भी कहा कि हमे ऐसा लग रहा है कि मंदिर निर्माण के लिए वर्तमान सरकार कोई कानून नही लाएगी। हम आगामी 31 जनवरी को होने वाली धर्म सभा मे साधु संतों को यह बताएंगे तथा उनकी राय मशविरे के मुताबिक आगे का कार्य करेंगे।

उन्होंने कांग्रेस द्वारा कानूनी प्रक्रिया में अड़ंगा डालने की बात भी कही तथा यह कहा कि कपिल सिब्बल द्वारा कैश लड़ा जाना ही इस बात का प्रमाण है लेकिन अगले प्रतिप्रश्न में उन्होंने कांग्रेस इसके प्रति शॉफ्ट कॉर्नर भी दिखाया। उनका बयान हालिया घटनाक्रम में बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है क्योकि कल ही सम्पूर्ण विपक्ष ने बंगाल से महागठबंधन के लिए हुंकार भरी है। इस प्रकार का गठबंधन 1989 के बाद पहली बार हो रहा है जब सभी प्रमुख विपक्षी दल एक ही मंच पर आकर सरकार बनाने के लिए विपरीत विचारधारा वाले दलों के साथ भी समझौता करने के लिए तैयार हुए है।

89 वाला गठबंधन कांग्रेस के खिलाफ जनतादल की अगुवाई में था जिसमे भाजपा भी शामिल थी ओर इस बार वाला गठबंधन भाजपा के खिलाफ है जिसके मुखिया के बारे हालफिलहाल कह पाना मुश्किल है। अपने खिलाफ हो रहे महागठबंधन से भी ज्यादा अगर भाजपा को ध्यान देने योग्य बात है तो वो है अपने सहयोगियों को मनाए रखना तथा अपने परम्परागत वोटरों को साथ रखना। कल भाजपा के बड़े नेता पूर्व केबिनेट मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा जो कि काफी समय से नाराज चल रहे है, भी महागठबंधन के मंच पर नज़र आये थे। हालांकि इस पर भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने शिघ्र संज्ञान लेने की बात कही परन्तु इसका नुकसान भी बिहार में कमोबेश होगा।  कुल मिलाकर जो घटनाक्रम बन रहा है उसके अनुसार अगर राममंदिर तथा अन्य ज्वलंत मुद्दों पर शीघ्र संज्ञान न लिया गया और अपने सहयोगियों को विश्वास में न रखा गया तो डगर वाकई मुश्किल हो जाएगी।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय