ईवीएम हैकिंग के सुर : एक बार फिर मुखर


भारत मे लोकसभा तथा विधानसभा के चुनावों से पहले तथा बाद में भी एक बात बड़ी मुखरता से उठती है कि ईवीएम हैक की जाती है या की गई है।
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भारत मे लोकसभा तथा विधानसभा के चुनावों से पहले तथा कभी कभी बाद में भी एक बात बड़ी मुखरता से उठती है कि ईवीएम हैक की जाती है या की गई है। आश्चर्य की बात यह है कि जो पार्टी यह आरोप लगा रही है वो तब के लिए भी लगा रही है जब वो खुद सत्ता में थी ओर अब जब विपक्ष में है तब भी आरोप जस के तस है। मैं यह नही कहता कि ईवीएम हैक नही हो सकता या हो सकता है, मेरा मन्तव्य खाली हालिया घटनाक्रम पर ही है। परसो एक व्यक्ति जिसका नाम सैयद शुजा था, जो अपने आप को साइबर एक्सपर्ट बता रहा था उसने लन्दन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की तथा भारत के चुनाव आयोग पर यह सीधा आरोप लगाया कि ईवीएम हैक होती है तथा इसका फायदा एक पार्टी उठाती है। इस बार खाली तीन राज्यो के चुनाव में उनकी टीम ने हैकिंग की कोशिशों को नाकाम कर दिया इसलिए तीनो राज्यो के चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में नही आये। इस दावे में कितनी सच्चाई है यह तो कहना मुश्किल है पर देश की साख इन सब चीजों से खराब होती है जबकि दावा करने वाला अपने दावे का सत्यापन करने के लिए उसके पास कोई तथ्य भी नही है, न वो अपनी पहचान बताने का साहस भी कर पा रहा है तो भी यह आरोप लगा रहा है।

भारत के चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को लेकर लंदन में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के मामले में दिल्ली पुलिस से एफआईआर दर्ज करने को कहा है। साथ ही आयोग ने पुलिस से कहा है कि ईवीएम हैक का दावा करने वाले साइबर एक्सपर्ट सैयद शुजा के बयान की भी जांच हो। इससे पहले केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को कांग्रेस प्रायोजित बताया। प्रसाद ने कहा- कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल वहां पार्टी की ओर से पूरे कार्यक्रम की मॉनिटरिंग करने गए थे। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 2014 में यूपीए सरकार थी। ईवीएम की तकनीक देखने के लिए 2010 में कमेटी बनी थी। हम सरकार में नहीं थे। 10 साल कांग्रेस सत्ता में रही तो ईवीएम ठीक थी। 2007 में मायावती, 2012 में अखिलेश जीते, ममता दो बार जीतीं, केजरीवाल जीते, अमरिंदर पंजाब में जीते, केरल में कम्युनिस्ट जीते तो ईवीएम को ठीक बताया जाता है। हम जीते तो खराब बताया गया। कांग्रेस 2019 लोकसभा चुनाव में मिलने वाली हार का अभी से बहाना ढूंढ रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत के चुनाव आयोग और लोकतंत्र की दुनियाभर में चर्चा होती है। आज कई देश भारत के प्रयोग सीखना चाहते हैं। जो पार्टी 58 साल शासन कर चुकी है, वह इस तरह के आरोप लगा रही है। ये 2014 के जनमत का अपमान है।
साइबर एक्सपर्ट के इस दावे को चुनाव आयोग ने नकार दिया है। आयोग ने कहा है कि ईवीएम ‘फुलप्रूफ’ हैं और हम गलत दावे करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के बारे में सोच रहे हैं। कुल मिलाकर अगर किसी को लगे कि ईवीएम की हैकिंग होती है तथा इससे चुनाव परिणाम बदले जा सकते है तो इसके प्रूफ लेकर उन्हें कोर्ट पहुंचना चाहिए या फिर चुनाव आयोग को इसका संज्ञान दिलवाना चाहिए। अगर तथ्य सहित बात योग्य मंच पर रखी जाए तो भारतीय लोकतंत्र तथा चुनाव आयोग के साथ साथ उस व्यक्ति या पार्टी की भी गरिमा बनी रहेगी जिसने इस प्रकार का आरोप लगाया है। अज्ञात व्यक्ति द्वारा विदेश की धरती पर प्रेस कांफ्रेंस करना तथा देश की बड़ी पार्टी जिसने सालो राज किया है उसके नेता नीति भूलकर वहां उपस्थित रहे यह वाकई खेदजनक है।

भारत के लोकतंत्र की साख तथा चुनाव आयोग की गरिमा बनी रहे।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय