सुप्रभात!


अब तक अपने मन्तव्यों को सिर्फ सोशल मीडिया तक ही सीमित रखा था।
Photo/Loktej

सुप्रभात! आज से आपके रूबरू हूँ, अपनी कलम के माध्यम से।

यानि, अब रोजाना आपकी गुडमोर्निंग होगी मेरे साथ।

अब तक अपने मन्तव्यों को सिर्फ सोशल मीडिया तक ही सीमित रखा था। कभी-कभी कुछ विशिष्ट हो जाता तो कुछ प्रिय हिंदी समाचार पत्रों में छपने भी भेज देता था। लेकिन इस विविधता सम्पन्न देश के वैचारिक रूप से समृद्ध शहर सूरत में समसामयिक विषयों की भरमार है, जिस पर चिंतन बरबस हो जाता है, चिंतन से मन्तव्य निकल कर आता है और लेखनी कह उठती है कि लिख डालो। लेकिन उसके लिये उचित मंच की महती आवश्यकता होती है।
सूरत के हिंदी समाचारपत्रों में सर्वाधिक वरिष्ठ लोकतेज समाचारपत्र उसके लिए सर्वाधिक उपयुक्त भी है। तो आज से समसामयिक विषय तथा रोजमर्रा के घटनाक्रम पर विस्तृत चिंतन के साथ आपके बीच हर रोज उपस्थित रहेंगे। मुद्दे कई हैं जिन पर लिखा जाना जरूरी भी लगता है। कुछ राष्ट्रीय, कुछ प्रांतीय, कुछ नगरीय मुद्दों से हम रोज रूबरू होते हैं। कुछ ऐसे विचार होते हैं जो जनसामान्य तक जाने जरूरी होते हैं। उन सभी विषयों पर अपने मन्तव्य के साथ आपके समक्ष आते रहेंगे।
आपकी नजर में भी ऐसे कोई मुद्दे, विषय या कहानियां हों जिसे आप समझते हों कि इस स्तंभ का हिस्सा होने चाहिये तो अवश्य बताएं। आपके सुझावों का स्वागत रहेगा।
व्यक्तिगत परिचय मेरा बस इतना ही है कि मैं जिंदा हूँ और जिंदा नज़र आता हूँ क्योंकि उसूलों पर अगर आंच आये तो टकरा जाने की तीव्र उत्कंठा आकंठ उद्वेलित हो जाती है।
आज के लिए बस इतना ही। कल से आपके बीच, आपके अनछुए विषयों के साथ उपस्थिति रहेगी।