अभी और इंतजार बाकी : राममंदिर


राम जन्मभूमि मामले की अगली सुनवाई कल 29 जनवरी को होने वाली थी। लेकिन वो कल भी नही हो पाएगी।
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राम जन्मभूमि मामले की अगली सुनवाई कल 29 जनवरी को होने वाली थी। लेकिन वो कल भी नही हो पाएगी। जस्टिस एसए बोबडे इस दिन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में बेंच सुनवाई नहीं कर सकेगी। सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर होनी है। इससे पहले 10 जनवरी को भी वकील राजीव धवन द्वारा जस्टिस यूयू ललित पर सवाल उठाए जाने के कारण जस्टिस ललित ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया था जिस कारण यह मामला कल तक के लिए मुतलवी कर दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने 25 जनवरी को अयोध्या विवाद की सुनवाई के लिए बेंच का पुनर्गठन किया था। जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर को शामिल किया गया। अब बेंच में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसए नजीर शामिल हैं। इसमे से जस्टिस बोबडे कल अनुपस्थित रहेंगे अतः अधूरी बेंच सुनवाई नही करेगी।

कल भी तारीख ही मिलेगी तथा वो तारीख बजट सत्र के बाद की ही मिलेगी अतः अगले चुनाव तक यह मामला ठंडे बस्ते में जाता हुआ लग रहा है। सुनवाई की तारीख टलने के बाद बाबा रामदेव ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को ही फैसला लेना है। सुप्रीम कोर्ट में तो जल्द फैसले की संभावना नजर नहीं आ रही है। ऐसे में अब मोदी सरकार को ही कुछ कदम उठाने होंगे। वैसे बाबा रामदेव भारत रत्न पुरुस्कारों की घोषणा के बाद भी थोड़े खफा से लग रहे है।

यह मुद्दा चुनाव में काफी गरमाएगा क्योकि 31 जनवरी को धर्म संसद में सन्त वृन्द भी इस मामले में निर्णय देने वाले है। इस प्रकार से देरी होते देख तथा 30 साल से इस पर सतत राजनीति होती हुए देखकर यही लग रहा है कि इस रात की सुबह फिलहाल नही होगी।
सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय