फिसली जबान : बदले बयान


कभी कभी लगता है कि राहुल गांधी जानबूझकर गलतीयां करते है। बाद में कह देते है कि जुबान फिसल गई।
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कभी कभी लगता है कि राहुल गांधी जानबूझकर गलतीयां करते है। बाद में कह देते है कि जुबान फिसल गई। अभी हाल ही में उन्होंने मसूद अजहर के आगे जी लगाकर विवाद खड़ा किये थे तब उनके समर्थकों ने कैसे भी करके बात को संभालने की कोशिश की थी तथा कुछ हद तक कामयाब भी हुए थे। क्योकि उन्होंने काफी ऐसे बयान भाजपा के नेताओ के खोज कर वायरल कर दिए जिसमे वो भी आतंकियों के आगे जी शब्द का उच्चारण कर रहे थे। हालांकि उन ट्रोल हो रहे नेताओ में से एक रविशंकर प्रसाद ने तो यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि उन्होंने व्यंग्य किया था।

कांग्रेस अध्यक्ष की कल फिर चेन्नई के कॉलेज में विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए अचानक जुबान फिसल गई। हुआ यूं कि जब वह भगोड़े आर्थिक अपराधियों और देश के कथित करप्ट उद्योगपतियों  की बात कर रहे थे तो उन्होंने नीरव मोदी की जगह नरेंद्र मोदी का नाम ले लिया। हालांकि इसका अहसास होते ही उन्होंने अपनी गलती सुधारी, मगर तब-तक हॉल ठहाकों से गूंज उठा।

राहुल गांधी ने विद्यार्थियों से पूछा कि नीरव मोदी ने कितनी नौकरियां पैदा की? मैं आपके साथ शर्त लगा सकता हूं कि सिर्फ 30 लाख रुपये के लोन में आप इससे ज्यादा नौकरियां पैदा कर सकते हैं। राहुल गांधी ने इस दौरान बैंकिंग सिस्टम को युवा उद्यमियों के लिए खोलने पर चर्चा की, ताकि युवा बिजनेस के लिए लोन ले सकें। उन्होंने कहा कि हम वह पैसा वापस लाना चाहते हैं, जो 15-17 भ्रष्ट कारोबारियों के पास गया है, जैसे कि नरेंद्र….नरेंद्र नहीं, नीरव मोदी। इस दौरान राहुल गांधी मुस्कुराए तो हॉल में ठहाके लगने लगे। इसके बाद फिर उन्होंने नीरव मोदी का नाम लेकर अपनी बात रखनी शुरू कर दी।

अब हो सकता है उनकी जबान फिसली हो पर इस बार वो ट्रोल नही होंगे क्योकि उन्होंने किसी आतंकी का नाम नही लिया है और जिनका लिया है उनके लिए उनको कोई शिकायत करेगा नही क्योकि कोई वजह भी नही बनती है। हाँ, एक बात उन्होंने अवश्य कही जो सच भी है और कड़वी भी। राहुल गांधी ने कहा कि क्या प्रधानमंत्री आप सब के बीच इस तरह खड़े होकर आप लोगों के सवालों को जवाब दे सकते हैं? वैसे आज तक कॉन्क्लेव के नाम से आयोजित प्रधानमंत्री के सारे कार्यक्रम प्रायोजित ही रहे है मतलब पहले से फिक्स लगते है। जिसके गवाह सभी पत्रकार भी है। लेकिन यहां अगर सच बोल दिया जाए तो बात नज़रबन्दी तक चली जाती है। जो एक लोकतांत्रिक देश के लिए अच्छी बात नही है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय।