अलगाववादी: अभी हटाई सुरक्षा अब हटाओ इनको


हमारे देश को जितना खतरा उसके बाह्य दुश्मनो से है उससे भी अधिक इसके आंतरिक दुश्मनों से है।
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हमारे देश को जितना खतरा उसके बाह्य दुश्मनो से है उससे भी अधिक इसके आंतरिक दुश्मनों से है। ऐसे कई लोग है जो अपने निजी स्वार्थ में आकर देश की जड़ो को खोखला करने का काम करते है। जिनके तुच्छ स्वार्थों ने इस देश को शर्मसार किया है, इसके नागरिकों को परेशान किया है ऐसे कुछ लोग चिन्हित भी है और बहुत से परदे के पीछे भी है। कभी कभी यह लगता है कि यह संख्या भारत मे ही सर्वाधिक है। जिनको देश से प्रेम नही है, सिर्फ अपने स्वार्थ की राजनीति करनी है, ऐसे लोगो से जनता भी जल्दी प्रभावित होती है क्योकि यह लोग अपने विचारों को बहुत अच्छे तरीके से किसी के भी मस्तिष्क में घुसा देते है। और जब इनका यह काम हो जाता है तो वो उन व्यक्तियों का इस्तेमाल करना प्रारम्भ कर देते है। माइंडवाश करने में माहिर ऐसे लोग अपने सम्पर्क के व्यक्तियों से कुछ भी करवाने में सक्षम होते है। जिसका परिणाम फियादीन जैसे घातक हमले भी हो सकते है क्योकि इन तथाकथित धार्मिक राजनैतिक नेताओ के द्वारा दिमाग मे अनर्गल भरवाए हुए व्यक्ति कभी भी आगे पीछे का नही सोचते है।
ऐसे कई अलगाववादी नेता हमारे देश के विभिन्न हिस्सों में पाए जाते है, जिन्हें भारत से तकलीफ है। जो इस देश को नुकसान पहुंचाने के लिए ही हर प्रकार के क्रियाकलाप करते है। वैसे तो हर जगह कमोबेश ऐसे लोग है लेकिन कश्मीर में ऐसे लोग सर्वाधिक है जो युवकों को अपने हिसाब से ढालकर आतंकवादी बनाते है, पत्थरबाज बनाते है, और तो और बाद में फियादीन भी बना देते है जो देश का नुकसान करने के लिए खुद को भी खत्म करने में जरा सा भी नही हिचकिचाते है।
ऐसे अलगाववादी नेताओं को अभी तक भारत सरकार सुरक्षा मुहैया करवाती रही है क्योकि सरकार को भी डर रहता है कि कही आपस की टकराहट में ही अगर इनको नुकसान पहुंच गया तो इनके समर्थक हिंसा का रास्ता इख्तियार कर लेंगे, चूंकि समर्थक भी हिंदुस्तानी है तो सरकार कभी भी नही चाहती कि उनका दमन किया जाए, उनका नुकसान किया जाए।
पुलवामा हमले के बाद भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है वो सीधे पाकिस्तान से तो नहीं जुड़ा है लेकिन भारत में बैठ कर पाकिस्तान की मदद करने वालों की कमर ज़रूर तोड़ देगा। सरकार ने फैसला किया है कि वो जम्मू कश्मीर में बैठकर अलगाववाद की बात कर लोगों को भड़काने वाले नेताओं की सुरक्षा अब नही करेगी। मीरवाइज़ उमर फारूक़, अब्दुल गनी भट, बिलाल लोन, हाशिम कुरैशी और शबीर शाह इन पांच लोगों की सुरक्षा सरकार मुहैया नहीं करवाएगी। हालांकि इस लिस्ट में एक और नेता का नाम भी जोड़े जाने की उम्मीद हमे थी। पाकिस्तानी समर्थक अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी की सुरक्षा का इस ऑर्डर में ज़िक्र नहीं है। जबकि वो भी आग लगाने में अव्वल है।
सरकार एक इस आदेश के बाद इन अलगाववादियों से सुरक्षा में तैनात जवानों के साथ-साथ सरकार की दी हुई गाड़ियां और अन्य सुविधाएं भी वापस ले ली जाएंगी। इन अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा पर सालाना 10 करोड़ का खर्च आता है। ये महंगी गाड़ियों में घूमते है और फाइव स्टार रेटिंग अस्पतालों में इलाज कराते हैं। एक अलगाववादी नेता की सुरक्षा में 20-25 जवान तैनात रहते हैं, और इनका सारा खर्च हम टैक्सपेयर लोगों की जेब से जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक मीर वाइज़ उमर फ़ारूक़ की सुरक्षा पर पिछले दशक में 5 करोड़ से ज्यादा रूपये खर्च किए जा चुके हैं,और सुरक्षा भी डीएसपी रैंक के अधिकारी करते हैं। अब्दुल गनी भट की सुरक्षा में 2.5 करोड़ खर्च हुए, और अब्बास अंसारी की सुरक्षा में 3 करोड़। जम्मू कश्मीर में इन नेताओं के अलावा कुल 1200 लोगों के पास किसी ना किसी दर्जे की सुरक्षा ज़रूर है। अब आप सोचिए कि एक और जहां ये नेता लक्ज़री लाइफ जीते हैं वहीं कश्मीर को हिंसा की आग में धकेल देते हैं।
सैयद अली शाह गिलानी भी कुछ इसी तरह से सरकार के खर्चे पर मजे ले रहे हैं। जिनकी सुरक्षा हटाने का आदेश अभी तक नही हुआ है। देश में ऐसे आतंकी हमले करने के पीछे अकेला पाकिस्तान ही नहीं है बल्कि उसका मनोबल बढ़ाने वाले भारत में बैठे ये नेता भी हैं। भारत सरकार ने इनपर नकेल कसने की कोशिश की है। इस फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए। साथ ही जिनकी सुरक्षा अभी तक नही हटाई गई है उनकी भी जल्द ही हटा लेनी चाहिए। इस देश मे अलगाववाद को कोई स्थान नही मिलना चाहिए न अलगाववादी को ही, चाहे वो कितना भी पावरफुल क्यो न हो देश से बढ़कर कोई नही है।
सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय