राफेल पर आरोप प्रत्यारोप की जंग: चुनाव तक?


राफेल डील को लेकर 38 महीने पुराना रक्षा मंत्रालय का एक नोट शुक्रवार को सामने आया।
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हमारा देश कुछ मामलों में बड़ा अद्भुत है। हम अगर कोई धारणा मन मे भी बना लेते है तो उसको सही सिद्ध करने में हम पूरा जी का जोर लगा देते है। एक ओर खास बात हमारे यहां है, वो यह कि अगर कोई रक्षा सामग्री की खरीद की जाती है तो उसको जंग में प्रयोग करने से पहले पक्ष विपक्ष द्वारा जुबानी जंग जरूर लड़ी जाती है। आरोप प्रत्यारोप लगाना हमारे यहां मामूली बात है। यहां तक कि सरकार भी विपक्ष पर आरोप लगा देती है।  खैर यह परंपरा का प्रवाह है जो कभी भी खंडित नही होगा। अभी जिस मुद्दे पर हमारे राजनेता जंग कर रहे है वो राफेल है। पक्ष और विपक्ष में जोरदार तनी हुई है। नए नए तथ्य पता नही कहाँ कहाँ से ढूंढ लाते है और बाद में उसका खंडन सरकार करती रहती है।इस मुद्दे पर कल दो तीन नए घटनाक्रम हुए थे।

राफेल डील को लेकर 38 महीने पुराना रक्षा मंत्रालय का एक नोट शुक्रवार को सामने आया। इस नोट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने नवंबर 2015 में कहा था कि राफेल डील पर प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से समानांतर बातचीत की जा रही है। मंत्रालय को इस पर आपत्ति थी। नोट में कहा गया था कि यह साफ है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की समानांतर बातचीत से भारत और भारत के वार्ताकार दल की स्थिति कमजोर हुई है। पीएमओ के अफसरों ने फ्रांस के साथ बातचीत में जो कहा है, वह रक्षा मंत्रालय के रुख से एकदम विपरीत है।

इसी नोट पर तत्कालीन रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के लिए एक संदेश लिखा था। इसमें कहा गया था कि रक्षा मंत्री कृपया इस मामले को देखें। हमारी पीएमओ को सलाह है कि उनके जो अधिकारी फ्रांस से वार्ता दल में शामिल नहीं हैं, उन्हें फ्रांस सरकार के अधिकारियों से समानांतर चर्चा नहीं करनी चाहिए। पीएमओ की समानांतर वार्ता से सौदे में मंत्रालय और भारतीय दल की स्थिति कमजोर होगी। हालांकि तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इसे अफसरों का ओवर रिएक्शन बताया था।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस रिपोर्ट के हवाले से कहा कि ये नए सबूत बताते हैं कि मोदी घोटाले के गुनहगार हैं। उन्होंने वायुसेना के 30 हजार करोड़ रुपए लूटकर अनिल अंबानी को दिए हैं। आम आदमी पार्टी के नेता राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री पर मुकदमा भी दाखिल करवा दिया है जो इस मामले का इस तरह का पहला मुकदमा है।

तत्कालीन रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि रक्षा मंत्रालय का नोट केवल राफेल डील की गारंटी और सामान्य नियम-शर्तों को लेकर था। जो कुछ भी अब मीडिया रिपोर्ट में आया है, उसका कीमत से कोई संबंध नहीं है। मतलब कोई घोटाला नही हुआ है। जो पीएमओ का हस्तक्षेप था वो सामान्य प्रक्रिया थी। रक्षा मंत्री सीतारामन ने इस पर कहा कि क्या कांग्रेस यह बताएगी कि मनमोहन सरकार के दौरान तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष सोनिया गांधी के कामकाज को भी हस्तक्षेप माना जाए? क्योंकि तब श्रीमती गांधी के इशारे पर ही हर काम होता था।

यह घोटाला था या खरीदी की सामान्य प्रक्रिया यह तो पता नही लेकिन कांग्रेस तथा उसके साथी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को उलझा जरूर रखा है। और अगर झूठ को भी बारबार बोला जाए तो लोग उसे सच समझ लेते है कही इस मुद्दे पर भी ऐसा ही न हो जाये।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय