परिणाम की आशंका के बीच क्या ऊर्जा भरेगी प्रियंका?


कल राजनीति के गलियारे में प्रियंका गांधी चर्चा का विषय रही।
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कल राजनीति के गलियारे में प्रियंका गांधी चर्चा का विषय रही। हालांकि अपने पिता राजीव गांधी के साथ नौ साल की उम्र में ही उनके पहले चुनाव में अमेठी पहुंच कर उनके साथ निर्वाचन क्षेत्र में घूमी थी तथा उसके ठीक 18 साल बाद जब उनकी माँ सोनिया गांधी पहली बार चुनाव लड़ी तब भी वो चुनाव प्रचार में गई थी। तब लोगो ने दादी इंदिरा गांधी के प्रतिबिम्ब की उनमे कल्पना की थी लेकिन बाद में उन्होंने राजनीति में कोई दिलचस्पी नही दिखाई। 2014 में जब कांग्रेस संकटकाल से गुजर रही थी तथा मोदी लहर चारो तरफ व्याप्त थी तब अमेठी, रायबरेली में उन्होंने चुनाव प्रचार किया था। ओर किसी तरह माता तथा भाई की नैया पार करने में सफल हुई थी।

बात 2014 के लोकसभा चुनाव की है। भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने एक रैली में कहा कि कांग्रेस अब बूढ़ी हो चली है। तो इसके जवाब में प्रियंका ने एक रैली में जनता से पूछा कि क्या मैं आपको बूढ़ी दिखाई देती हूं? इस पर जनता ने जमकर तालियां बजाईं और प्रियंका इंदिरा गांधी के अंदाज में मुस्कुराती रहीं। कांग्रेस का एक धड़ा हमेशा प्रियंका को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग करता रहा है। अब जबकि कांग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई वाला यह चुनाव होने वाला है तब प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तरप्रदेश का प्रभारी बनाया जाना महत्वपूर्ण है,जहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव लड़े तथा जो योगी आदित्यनाथ का भी क्षेत्र है,जहाँ कांग्रेस की परम्परागत सीट अमेठी तथा रायबरेली भी है जो तथाकथित बंटवारे में कांग्रेस के हिस्से में आई है।

राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में फरवरी में ही 13 रैलियों के साथ प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे। इन रैलियों में उनके साथ प्रियंका भी नजर आ सकती हैं। जो उनकी नई राजनैतिक पारी की शुरुआत होगी। हो सकता है कि अपनी माँ सोनिया की जगह वो रायबरेली सीट पर चुनाव भी लड़े। फिलहाल प्रियंका अपनी बेटी के ऑपरेशन के लिए लन्दन गई हुई है। हालांकि भाजपा ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा है कि राहुल फैल हो रहे है तभी प्रियंका की एंट्री हुई है। ट्विटर तथा अन्य सोशल साइट्स पर भी लोग इस पर चुटकी ले रहे है कि परिवार की प्राइवेट लिमिटेड फर्म में नए सदस्य की ऑफिशियल इंट्री हुई है। लेकिन आगामी चुनाव के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है क्योकि पूर्वी उत्तरप्रदेश में 26 सीट आती है तथा सपा बसपा के गठबंधन के बाद त्रिकोणीय संघर्ष में कदाचित कांग्रेस को फायदा भी हो जाये क्योकि परम्परागत दो सीट तो उनके खाते में रही ही है।

परिणाम क्या रहेगा यह तो भविष्य ही बताएगा पर परिणाम की आशंका में प्रियंका भी भागीदार रहेगी।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय।