रक्षा क्षेत्र में राजनीति कतई नही


हमारा देश भारत अपने पड़ौसी देश पाकिस्तान तथा चीन से तब से झुंझ रहा है जबसे हम आजाद हुए है।
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हमारा देश भारत अपने पड़ौसी देश पाकिस्तान तथा चीन से तब से झुंझ रहा है जबसे हम आजाद हुए है। आजादी के साथ ही हमे दुश्मन पड़ौसी जैसे जबरदस्ती के अनचाहे उपहार के रूप में मिले है। ऐसी स्थिति में हमे सामरिक रूप से समृद्ध होना अति आवश्यक है जैसे इजरायल है। समय समय पर हर सरकार इसका प्रयास करती भी रही है। हमने युद्ध जीते है, हर बार अपना डंका विश्व स्तर पर बजाया है।
लेकिन आगे के संकटो से सदैव पूर्व की भांति निपटने के लिए हमे विश्व के अनुरूप तकनीकी के मामले में अपडेट भी रहना होगा। वर्तमान सरकार इसके लिए प्रयासरत भी है।

बजट सत्र की शुरुवात में संसद के दोनों सदनों को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रपति कोविंद के कहा कि सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए नई नीति का परिचय दिया है। सरकार ने वन रैंक, वन पेंशन नीति लागू की है। वायुसेना में राफेल लड़ाकू विमान के आने से देश की ताकत बढ़ेगी। देश के सुरक्षा के मुद्दों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। देश की सुरक्षा के साथ वाकई समझौता होना ही नही चाहिए और सबसे बड़ी बात इन मामलों में राजनीति बिल्कुल नही होनी चाहिए। एक बार इस विषय पर फालतू की राजनीति हम देख चुके है जब बोफोर्स का मुद्दा चला था। इस मुद्दे को लेकर वीपी सिंह चले थे और सरकार बनाने में भी सफल हो गए। इस मुद्दे के अलावा राजीव गांधी की कोई असफलता नही थी। और तो ओर जो विवादित तोप रही वो कारगिल युद्ध मे वरदान स्वरूप रही थी।

ठीक वैसे ही अब राफेल को लेकर हो रहा है। कोर्ट द्वारा मन्तव्य देने के बावजूद भी यह मुद्दा बारबार राजनैतिक गलियारे में गूंजता रहा है और अभी भी गाहेबगाहे इसका गाना चालू ही रहता है। वैसे सरकार को इस पर जेपीसी बैठाकर जांच करवाकर इसका दूध का दूध पानी का पानी कर देना चाहिए नही तो ऐसा न हो कि कही यह भी बोफोर्स की तरह साबित हो जिसके अंदर कुछ नही निकला, खाली बाते ही रही पर सरकार ले बैठा था। इसी बीच अच्छी खबर भी है कि हमारे रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को दो अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी है। मंत्रालय ने 40 हजार करोड़ की लागत से 6 पनडुब्बियां बनाने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। इसके अलावा सेना के लिए 5 हजार एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल मिलान 2टी हासिल करने के लिए भी मंत्रालय ने हरी झंडी दे दी है। मिलान 2टी मिसाइल का भी इस्तेमाल 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान हुआ था।

भारतीय सेना के पास अभी एटीजीएम की कमी है। इजरायल की एटीजीएम स्पाइक और अमेरिका की जेवलिन को लेकर अभी कोई समझौता नहीं हो पाया है। उधर, डीआरडीओ की नाग मिसाइल अभी विकास के चरण में है। ऐसे में रक्षा मंत्रालय ने मौजूदा जरूरत पूरी करने के लिए मिलान मिसाइलों को मंजूरी दी है। फरवरी के मध्य में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत दौरा करेंगे। इस दौरान इजरायल और भारत के बीच 3552 करोड़ रुपए की स्पाइक डील पर फैसला हो सकता है।  हमारा देश सामरिक रूप से समृद्ध बने इसकी चिंता सभी राजनैतिक दलों को समान रूप से आपसी मतभेद भूल कर करनी चाहिए तथा सत्ताधारी दल को इन सभी बड़ी डील को पारदर्शी रखना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के आरोप के लिए कोई जगह न बचे। राजनीति तथा सत्ता से बड़ा देश है यह सदैव सबके मन मे रहना ही चाहिए।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय