हमारा गौरव हमारा देश


आज हमारे देश मे गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है।
Photo/Loktej
आज हमारे देश मे गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। 69 वर्ष पूर्व हमारे इस महान देश में संविधान लागू होकर इसे सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न भारत गणराज्य का नाम दिया गया था। आजादी के बाद अगर हमारे समक्ष कोई मुख्य चुनौती थी तो वो सुशासन के साथ देश का सर्वांगीण विकास करके उसे अन्य देशों के समकक्ष लाना तथा यहां के निवासियों के जीवन स्तर को सुव्यवस्थित उच्चस्तर पर लाना थी।
संसाधनों का हमारे देश मे कोई अभाव नही था परन्तु उनका सदुपयोग हो ऐसी पद्धतियों का अभाव था। हमारा शिक्षा का ढांचा पूरा बिगड़ चुका था। प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की अगुवाई में देश ने बहुत अच्छी शुरुआत की। जबकि आजाद होते ही हमे दो युद्धों का सामना करना पड़ा था तो भी भारत उससे उबर कर विकास की ओर अग्रसर हुआ। नवरत्न कम्पनियां बनाई गई। नदियों पर बांध बनवाकर सिंचाई तथा ऊर्जा के स्रोत उन्नयन की दिशा में उत्तम कदम हमने बढ़ाये। भारत आत्मनिर्भर होने की दिशा में अग्रसर हुआ जो गति आज भी जारी है, यह अलग बात है कि कभी कभी गति विविध कारणों से मंद हुई है, उसका कारण अस्थिर सरकारें रही है। लेकिन हम तरक्की की राह पर अग्रसर है। हमपर हुए हमलों को झेलकर हर युद्ध मे हमने विजयश्री का वरण किया है। वैश्विक स्तर पर हमारी साख बढ़ी है। विकासशील अर्थव्यवस्था के साथ साथ सर्वाधिक सम्भावनाओ वाली अर्थव्यवस्था भी हम है।
हर तरह से उन्नति करते हुए सक्षमता की ओर बढ़ते हुए हमने कोई भी क्षेत्र बाकी नही छोड़ा है। एक हॉलीवुड फिल्म की लागत में हमने मंगल मिशन भी किया है तो एक साथ 100 से अधिक उपग्रह छोड़कर न केवल रिकॉर्ड बनाया है बल्कि इससे कमाई भी की है।
हर तरह से सक्षम प्रगतिशील देश का विरुद होने के बावजूद भी हम छोटी छोटी बातों में उलझकर न केवल हमारे समय और श्रम का अपव्यव करते है बल्कि हमारे देश के आगे बढ़ने की गति को भी मंद करते है। जाति, धर्म, सम्प्रदाय जैसे मुद्दों को हम कभी कभी इस महान देश से भी ऊपर समझ लेते है जिसे हम भारत माता की संज्ञा देते है। राजनैतिक पार्टियों का समर्थन करते करते हम कभी कभी उसमे इतना खो जाते है कि उससे इतर हमे कुछ दिखता ही नही है।
छोटे मुद्दों में उलझकर हम भूल जाते है कि हमारा प्रथम कृतव्य देश के प्रति है। हम इतिहास को जानते है पर उससे सीखते नही कि हमने पूर्व में क्या गलतियां की। हम दूसरे देशों के नागरिकों द्वारा अपने देश के प्रति निष्ठा के उदाहरण तो देते है पर उन्हें आत्मसात न करके उन्हें सिर्फ ज्ञान उड़ेलने के लिए ही प्रयोग करते है।
आज भी हमारे देश मे प्रधानमंत्री को अपील करनी पड़ती है कि स्वच्छता रखो जबकि हमारे राष्ट्रपिता का यह संदेश पूरे विश्व मे प्रख्यात है कि जहां स्वच्छता वहां ईश्वर का निवास है। हमे कर्तव्यों की याद दिलानी पड़ती है  जबकि अधिकारों के लिए हम तुरन्त लड़ जाते है।
अगर देश को बदलना है, उसे विश्वस्तर पर अग्रणी करना है, हमारे यहां के नागरिकों के जीवन स्तर को समृद्ध करना है, संसाधनों का सदुपयोग करना है तो सबसे पहले हमें खुद को बदलना होगा। राष्ट्र प्रथम की भावना को अपने मन मे जागृत करना होगा। हमे हमारे इस महान देश पर गर्व है, यह भाव हम सभी के हृदय में हो।
जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है,
 नर नहीं नर पशु है, वह निरा  मृतक समान है।
सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय