निंदा नही अब रण चाहिए


मेरे प्रिय कवि रामधारी सिंह दिनकर की यह पंक्तियां आज विशेष रूप से मुझे याद आ रही है।
Photo/Loktej

जो अगणित लघु दीप हमारे,
तूफानों में एक किनारे,
जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन,
माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल
कलम, आज उनकी जय बोल।
मेरे प्रिय कवि रामधारी सिंह दिनकर की यह पंक्तियां आज विशेष रूप से मुझे याद आ रही है। यह कविता उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले क्रांतिकारियों तथा सैनिकों के लिए लिखी थी। वर्तमान में परसो हुई घटना के सन्दर्भ में मुझे इसकी याद इसलिए आई कि अगर कोई भी जवान युद्ध मे शहीद होता है अथवा लड़ते हुए शहीद होता है तो भारत माँ का भाल ऊंचा होता है कि मेरे पुत्र ने मेरे लिए अपने जीवन को तुच्छ समझ शत्रु से लड़ते हुए तृण समान समझ कर त्याग दिया, लेकिन जब वही जवान किसी षडयंत्र के तहत शांति के दिनों में बिना किसी युद्ध या लड़ाई के शहीद हो जाता है तो हर शहादत पर ऊंचे होने वाले मस्तक पर भी चिंता तथा दर्द की रेखाएं जरूर उभरती होगी।
जलजलाकर बुझ गए किसी दिन वाले दिन अब नही होने चाहिए, क्योकि हम सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न है। हम हर निर्णय के लिए स्वतंत्र है। हम हमारी सुरक्षा के लिए ही नही बल्कि हमारे ज्ञात तथा अज्ञात शत्रुओं पर केवल शक की बिला पर भी कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र तथा सक्षम है। उस समय अगर हमारे देश का कोई ज्ञात शत्रु किसी घटना को न सिर्फ अंजाम देता है बल्कि उसकी जिम्मेदारी भी लेता है तो यह हमारे लिए एक प्रकार से गाल पर तमाचा पड़ने के समान है। ओर उसके बाद हम खाली निंदा करके या धमकी देकर ही रह जाये तो हमारी सक्षमता किस काम की? किस काम के वो हथियार जो हम हर गणतंत्र दिवस को परेड में देखते है? क्या वो सिर्फ नुमाइश के लिए ही है? क्या उनका उपयोग करके हमे हमारी सक्षमता सिद्ध नही करनी चाहिए?
कुछ तथाकथित प्रबुद्ध लोग यह कहते है कि हमको अंतरराष्ट्रीय दबाब तथा मानवाधिकार आयोग को भी देखना पड़ता है। क्या मोसाद जब कार्यवाही करता है तब क्या वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूछ कर करता है? क्या उसे भी मानवाधिकार की फिक्र होती है? इस पर भी कुछ लोग कुतर्क दे सकते है कि हमारे देश मे ही कुछ विभीषण है जो नही चाहते कि कोई बड़ी कार्यवाही हो। मैं यह कहना चाहूंगा कि इस बात में कोई तथ्य नही है। कोई भी यह नही चाहता कि देश की आंतरिक तथा बाह्य सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता किया जाए। सिर्फ राजनैतिक फायदे के लिए किसी के बयान को तोडमोड कर न दिखा कर हमें सिर्फ हमारे लक्ष्य की तरफ ही आगे बढ़ना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब विपक्षी नेता की भूमिका में थे तब लोग अक्सर यह कहते थे कि मोदीजी का सीना छप्पन का है, वो जरूर प्रधानमंत्री बनते ही पाकिस्तान को सबक सिखाएंगे। लेकिन ढाक के वही तीन पात अभी तक है। एक अदद सर्जिकल स्ट्राइक के अभी तक कोई बड़ी कार्यवाही इन पांच सालों में नही हुई है। और जो सर्जिकल स्ट्राइक हुई है उसका प्रचार हाल में चुनावी फायदे के लिए किया जा रहा है। मुझे कोई आपत्ति नही है , न ही देश की जनता को इससे आपत्ति है कि आप राजनैतिक फायदा लो, जरूर लो लेकिन कुछ ऐसा करो जिससे कि हमे भी लगे कि हमारे देश मे प्रधानमंत्री निर्णय त्वरित तथा ठोस लेते है, केवल बाते नही करते। बिरयानी हो सकता है आप खा आये होंगे पाकिस्तान जाकर लेकिन अब वक्त है रिटर्न गिफ्ट का, उस खाने के बदले हमारे देश के जवानों को निर्देश दो की उनको छठी का दूध याद दिला देवे।
सिर्फ मोस्ट फेवरेट नेशन का तमगा हटा देने से कुछ नही होगा। अभी हमारे लिए यह जरूरी है कि दुश्मन देश को इस तरह बर्बाद कर दो जैसे इजराइल करता है। आज के समय मे हर राजनैतिक दल आपके साथ है, देश की पूरी जनता आपके साथ है, देश की सेना हर रूप से सक्षम है तो फिर देर किस बात की है?
भारत माता के मस्तक को उसके बच्चो के रक्त से रक्तरंजित होने से पहले अरिरक्त से माँ के चरणों का अभिषेक जरूरी है।
सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय