मकर सक्रांति : ॐ सूर्याय नमः


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आज हम बात हमारे पर्व मकर सक्रांति की करते है। यह ऐसा पर्व है जो इस शताब्दी में 14 जनवरी को ही हमेशा आया है। लीप ईयर वाले साल में हो सकता है कि मकर संक्रमण 14 को रात्रि को भी हुआ हो परन्तु यह 14 जनवरी को ही मनाया जाता है।
सूर्य जब बृहस्पति के घर अथार्थ धनु व मीन राशि मे रहता है तब ऐसी मान्यता है कि वो अपने गुरु की सेवा में रत रहते है। अतः इन दोनों समय को मल मास कहा जाता है तथा इस समय कोई भी शुभ कार्य हिन्दू पद्धति अनुसार नही किया जाता है।

धनु के मल मास जो कि दिसम्बर मध्य से जनवरी मध्य तक रहता है उसके पश्चात मकर राशि मे प्रवेश के दिन इसे विशेष महत्वपूर्ण दिवस माना जाता है। मकर तथा कुम्भ राशि को शनि की राशि माना गया है जो कि पुराणो के अनुसार सूर्य का पुत्र है। मकर राशि मे प्रवेश को महत्व देते हुए इस दिन दान पुण्य का विशेष महत्व समझा गया है।

इस दिन तीर्थ स्नान का भी हमारे प्राचीन ग्रन्थों में विशेष फलदायी बताया गया है। इस साल प्रयागराज में कुम्भ महापर्व भी कल से प्रारम्भ होगा तथा पहला शाही स्नान भी कल प्रातः काल होगा।
हमारे गुजरात मे इस दिन को उत्तरायण भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यतानुसार आज के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी पृथ्वी का दक्षिणी ध्रुव उत्तरी ध्रुव से थोड़ा नीचे हो जाता है जिससे दिन के घण्टो में वृद्धि होना प्रारम्भ हो जाता है।
गुजरात मे दो दिन के उत्सव के रूप में इसे मनाया जाता है। इस दिन हमारे राज्य में पतंगों की धूम रहेगी। वैसे हमारे राज्य के जितनी पतंग अन्य किसी भी जगह नही उड़ाई जाती है। यहां तक कि सरकार भी इसका विशेष उत्सव मनाती है जिसमे दुनियाभर के पतंगबाज अपनी अलग अलग प्रकार की पतंगों से पतंगबाजी करते है।

आस्था के इस पर्व को हमे सकारात्मक रूप से लेते हुए यथायोग्य दान उन संस्थाओं को अवश्य देना चाहिए जो प्राणी कल्याण, जनकल्याण के कार्य करती हो। इसके अलावा पतंग उड़ाते समय भी यह ध्यान रहे कि ज्यादा पक्के मांझे का इस्तेमाल न करे और सुबह शाम को जिसे हम संध्या वेला कहते है उस समय पतंग उड़ाने से बिल्कुल परहेज करें क्योकि वो समय परिंदे ज्यादा उड़ते है।
पतंग उड़ाते समय सावधानी रखें, बच्चो का विशेष ध्यान रखे। हो सके तो ओवरब्रिज का उपयोग न करे।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय।