क्या राममंदिर सिर्फ राजनैतिक मुद्दा ही है?


राम मंदिर मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राम मंदिर के मुद्दे पर अध्यादेश का फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा ।
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राम मंदिर मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि राम मंदिर के मुद्दे पर अध्यादेश का फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा । भाजपा के २०१४ के घोषणा पत्र में राममंदिर के बारे में यह उल्लेख किया था कि ‘भाजपा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए संविधान के भीतर सभी संभावनाएं तलाशने के अपने रुख को दोहराती है।’

अब संविधान के भीतर की क्या सम्भावनाये तलाश करेंगे यह तो भगवान राम ही जानते है क्योकि साढ़े चार साल तो हो गए है रामभक्तों को राह देखते देखते।

अब जब आम चुनाव में कुछ समय ही रह गया है तब एक बार फिर इस मुद्दे को हवा दी जा रही है।

पिछले महीने देश भर में विशाल धर्मसभाये की गई। फिर से पूरे देश भर में राममंदिर के लिए रामभक्त आशान्वित हो गए। सबको यही लग रहा था कि अगर एससी एसटी तथा तीन तलाक के मुद्दे पर अध्यादेश आ सकता है तो राममंदिर पर तो जरूर अध्यादेश वर्तमान सरकार लाएगी।

लेकिन मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा था कि राम मंदिर मुद्दे पर अध्यादेश लाने के बारे में न्याय प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वकील खलल पैदा कर रहे हैं, इसलिए अदालती कार्यवाही धीमी हो गई है। न्याय प्रक्रिया खत्म होने के बाद सरकार के तौर पर हमारी जो भी जिम्मेदारी होगी, हम वह करेंगे।

उसी के साथ वो आशा जो लोगो ने साढ़े चार साल पहले सँजोई थी वो खत्म हो गई। अब सरकार के तौर पर प्रधानमंत्री जी कैसी जिम्मेदारी मानते है वो तो समय ही बताएगा लेकिन इस बीच संघ के अनुसांगिक संगठन विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, “हमें लग रहा है कि सुनवाई अभी कोसों मील दूर है। ऐसे में विहिप का फैसला है कि हिंदू समाज सालों तक कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं कर सकता। हम चाहते हैं कि सरकार अध्यादेश लाकर भव्य मंदिर बनाए। अब संत तय करेंगे कि हमें आगे क्या करना है। सन्तो की धर्मसंसद ३१ जनवरी को होनी है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मंगलवार को कहा कि लोगों को उम्मीद है कि मोदी सरकार राम मंदिर का निर्माण कराने के वादे को अपने कार्यकाल में पूरा करेगी क्योंकि बीजेपी इसके लिए हर संभव कोशिश करने का वादा कर २०१४ में सत्ता में आई थी। संघ ने प्रधानमंत्री जी के बयान को सकारात्मक बताया।

लेकिन अब लोग असमंजस में है तथा कही न कही यह मान चुके है कि राममंदिर का मुद्दा सिर्फ राजनैतिक मुद्दा भर ही रह गया है। आगे क्या होगा यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है पर तंबू में बैठे रामलला यह जरूर सोच रहे है कि कब तक वो चुनावी मुद्दा बने रहेंगे।

अयोध्यापति श्रीराम तथा भारत माता की अनन्त जयजयकार