एकमात्र फोस्टा ही व्यापारिक हित के लिये काम कर सकती हैः गजेन्द्रसिंह राठौड़


सूरत के अग्रणी कपड़ा कारोबारी एवं व्यापारी नेता गजेन्द्र सिंह राठौड़ के सूरत संगठन समिति में मंत्री मनोनित होने पर विशेष भेंटवार्ता।
गजेन्द्र सिंह राठौड़ (लोकतेज फोटो)
  • व्यापार की दृष्टि से भाजपा से कांग्रेस 100% बेहतर है…

सूरत। कपड़ा व्यवसायी और दो वर्ष पूर्व सूरत में हुए जीएसटी आंदोलन से चर्चा में आए गजेन्द्र सिंह राठौड़ की राजनीतिक पारी की औपचारिक शुरूआत उन्हें सूरत शहर कांग्रेस समिति का मंत्री मनोनित किये जाने के साथ हुई है। यूं तो कांग्रेस द्वारा घोषित कार्यकारिणी फहरिश्त काफी लंबी है, लेकिन उक्त सूची में कुछेक दिलचस्प नामों में गजेन्द्र सिंह एक हैं। ‘व्यक्ति विशेष’ में आज व्यावसायिक और राजनीतिक मुद्दों पर उनसे लोकतेज की बातचीत के प्रमुख अंश प्रस्तुत हैं।

गजेन्द्र सिंह राठौड़ मूल रूप से राजस्थान के जोधपुर से हैं और स्कूली शिक्षा सिरोही से पूरी कर १९९१ में कामकाज के लिये सूरत आए। यहां उन्होंने कपड़ा क्षेत्र में नौकरी से शुरूआत की और समय के साथ आगे बढ़ते हुए आज स्वतंत्र रूप से आढ़त का बिजनेस कर रहे हैं। व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ विगत वर्षों में वे स्थानीय धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के माध्यम से सेवाकार्यों में जुटे रहे हैं। आनंद निवास मार्केट के अध्यक्ष एवं फोस्टा के सदस्य होने के नाते व्यापारिक हितों के मुद्दों को भी वे उचित पटल पर उठाते रहते हैं।

गजेन्द्र सिंह जीएसटी के खिलाफ सूरत में हुए आंदोलन के कर्णधारों में एक रहे हैं। ज्ञातव्य है कि जीएसटी का आंदोलन कपड़ा बाजार के प्रतिष्ठित संगठन फोस्टा की अप्रत्यक्ष अगुवाई में भले चलाया गया, लेकिन इसकी शुरूआत गजेन्द्र सिंह और उनके निकटतम व्यावसायिक मित्रों द्वारा बनाये गये वॉट्सएप ग्रुप के माध्यम से हुई थी। जीएसटी लागू होने से सूरत के व्यापारियों को क्या दिक्कतें आ सकती हैं इसकी जागरूकता सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाने पर इसका अप्रत्याशित प्रतिसाद‌ मिला। इसी से प्रेरित होकर युवा व्यवसायियों के गुट ने जब आंदोलन का खाका तैयार कर लिया उसके बाद अन्य दिग्गज व्यापारी नेता और संगठन इस आंदोलन का हिस्सा बने थे एवं जीएसटी संघर्ष समिति का गठन किया गया था। जीएसटी आंदोलन के रोजमर्रा के कार्यक्रमों के सुचारु संचालन के लिये गठित किये गये फोस्टा टास्क फोर्स में भी इनकी अहम भूमिका रही, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आंदोलन को जब दबाने की राजनीतिक कोशिशें हो रही थीं तब इसी टास्क फोर्स के सदस्यों पर सूरत पुलिस और आईबी की बाज नजर हुआ करती थी।

जीएसटी आंदोलन सफलता पूर्वक अपने अंजाम तक नहीं पहुंचा इसका कारण बताते हुए गजेन्द्र सिंह कहते हैं कि चुंकि अधिकांश कपड़ा व्यवसायी प्रवासी हैं एवं उनका एक पार्टी/विचारधारा के प्रति झुकाव रहा है, इसलिये जिस तीव्रता से सरकार के खिलाफ मोर्चाबंदी होनी चाहिये थी वैसी हो नहीं पाई। साथ ही व्यवासयी वर्ग हमेशा से प्रशासन के खिलाफ स्वर बुलंद करने से डरता रहा है। जिस प्रकार किसान समुदाय अपनी मांगों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराते हैं, उस ढँग से अपनी बात रखने से बिजनैसमेन कतराते रहे हैं। तमाम विपरित हालातों के बावजूद आंदोलन सफलता की कगार पर ही था लेकिन आखिरी समय पर वह राजनीति का शिकार हो गया। व्यावसायिक समुदाय में फूट पड़ गई और सरकार ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।

राठौड़ आगे कहते हैं कि विडंबना देखिये! आंदोलन के प्रारंभ के वक्त सरकार के समक्ष जीएसटी से जुड़ी दिक्कतों के जो बिंदु उठाये गये थे, आज उन्हीं बिंदुओं का सरकार महीना-दर-महीना सरलीकरण करती जा रही है। कपड़ा कारोबार एक अनओर्गेनाईज्ड सेक्टर है, जहां १०-१५ स्थानों से गुजर कर कपड़े की प्रोसेसिंग पूरी होती है। वैकल्पिक रूप से यदि यार्न स्तर पर ही सारा टेक्स सीमित किया जा सकता था। सूरत के व्यापारियों को टैक्स देने से कोई परहेज नहीं है। यदि प्रारंभ में ही विवेक से काम लिया गया होता, तो सूरत के कपड़ा उद्योग को जो भारी नुकसान हुआ है, व्यापारियों के बिजनेस में जो भारी गिरावट आई है, उससे बचा जा सकता था।

जहां तक सूरत में कपड़ा व्यापारियों के प्रतिनिधि संगठन का प्रश्न है, गजेन्द्र सिंह दो टूक कहते हैं कि यदि व्यापारी हित के लिये कोई काम कर सकता है तो वह एकमात्र फोस्टा ही है। अन्य जो नये संगठन बने हैं वे फोस्टा के ही पूर्व अध्यक्षों व अन्य स्थापित हितों का कपड़ा बाजार पर अपना प्रभुत्व कायम करने के प्रयास हैं। आज जरूरत इस बात की है कि सभी मार्केटों के व्यापारी एक होकर फोस्टा में पिछले कई वर्षों से लंबित चुनाव को करवा कर फोस्टा की प्रतिष्ठा को बढ़ाएं और उसे नई ताकत प्रदान करें।

अपने राजनीतिक सफर के बारे में राठौड़ बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत बहुजन समाज पार्टी से की और राजनीतिक सक्रियता राजस्थान तक ही सीमित थी। अपने व्यवसाय को उन्होंने हमेशा राजनीति से दूर रखा। पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के प्रचार में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया उसी का नतीजा है कि आज संगठन में उन्हें हिस्सा मिला है।

गजेन्द्र सिंह कहते हैं कि व्यापार की दृष्टि से देखें तो भाजपा से कांग्रेस सौ गुना बेहतर रही है। कांग्रेस ही है जो अर्थव्यवस्था को बेहतर ढंग से संभाल सकती है। राठौड़ चुटकी लेते हुए कहते हैं कि अब परिस्थिति बदली है और सूरत में ५० प्रतिशत व्यापारियों का चुप रहकर भी रुझान कांग्रेस की ओर बढ़ रहा है। विगत दिनों राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा सैंकड़ों बसें भरकर मतदाता भेजे गये और अधिकांश कांग्रेस को वोट देकर आए!

विगत राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा सूरत से सैंकड़ों बसों में मतदाता भेजे गये और अधिकांश कांग्रेस को वोट देकर आए!

गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की तुलना में सूरत में कांग्रेस को कामयाबी न मिलने के कारण का विश्लेषण करते हुए वे कहते हैं कि सूरत हमेशा से भाजपा और संघ की प्रयोगशाला रहा है। यहां भाजपा का कोर-वोट बेज़ है और उसमें सेंध लगाना थोड़ा कठिन है। इतना ही नहीं जीएसटी और पाटीदार फेक्टर के बावजूद चुनाव से एन पहले प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ ‘नीच‘ वाली टिप्पणी ने भी वोटों का ध्रुवीकरण कर दिया जिससे कांग्रेस को नुकसान हुआ। साथ ही कांग्रेस का संठगन भी दक्षिण गुजरात में कमजोर है, यह स्वीकार करने से परहेज नहीं करना चाहिये। भविष्य में संगठन को मजबूत करने के लिये वे और उनके साथी कटिबद्ध हैं।

तो फिर वर्ष २०१९ के आम चुनाव को लेकर क्या कहेंगे? इस पर गजेन्द्र सिंह कहते हैं कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में जीत के साथ कांग्रेस ने सेमीफायनल जीत लिया है और वे २०१९ को लेकर भी आशावादी हैं।

गजेन्द्रजी टेक्सटाईल युवा ब्रिगेड के संस्थापकों में से एक हैं और जीएसटी आंदोलन को सड़क पर जन-जन तक पहुंचाने में इनका बड़ा योगदान रहा। अब इनकी राजनीतिक पारी कैसी रहती है यह तो समय के गर्भ में है, लेकिन मित्र के नाते हमारी शुभकामनाएं उनके साथ हैं।

ललित शर्मा, समाजसेवी एवं लेखक

गजेन्द्रजी जुझारू व्यक्तित्व के धनी हैं और उम्मीद करता हूं कि सूरत के कपड़ा मार्केट क्षेत्र में कांग्रेस को स्थापित करने की दिशा में उनकी संगठन में नियुक्ति उपयोगी सिद्घ होगी।

रमेशकुमार सिंह, व्यवसायी

लोकतेज के इस ‘व्यक्ति विशेष’ स्तंभ में हम आपको सूरत शहर और आसपास के उन प्रतिभावान चेहरों से रूबरू करवाते हैं जिन्होंने राजनीतिक, सामाजिक, व्यावसायिक व अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय मुकाम हासिल किया है। यदि आप भी ऐसे किसी व्यक्तित्व को जानते हैं और समझते हैं कि उनकी कहानी इस स्तंभ के माध्यम से लोगों तक पहुंचे तो हमें loktejonline @ gmail.com पर इमेल करके अवश्य बताएं।